आयकर विभाग ने दो कंपनियों-ब्रिस्क इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड तथा कॉरपोरेट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के खिलाफ कर चोरी से संबंधित जांच के सिलसिले में छापेमारी की थी जिनका कथित तौर पर स्वामित्व और परिचालन नियंत्रण कैलाश गहलोत के परिवार के सदस्यों के पास है।
कैलाश गहलोत ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया था और आप ने कार्रवाई को ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ करार दिया था। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में खुलासा हुआ कि सितंबर 2018 में हरीश गहलोत ने अपने छोटे पुत्र नीतेश गहलोत को एक करोड़ रुपये की नकदी दी थी जो प्रवासी भारतीय हैं और दुबई में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें यह धन कथित तौर पर हवाला चैनल के जरिए दुबई भेजने के लिए दिया गया था।
एजेंसी ने कहा, ‘‘नीतेश गहलोत ने अपने संपर्कों के जरिए दिल्ली के हवाला डीलर इंदरपाल वधावन से संपर्क किया। वधावन ने चार लाख रुपये कमीशन के तौर पर अपने पास रख लिए और 96 लाख रुपये के बराबर दिरहम दुबई पहुंचाए। यह राशि नीतेश गहलोत के मित्र ने हासिल की और इसे नीतेश के दुबई बैंक एकाउंट में जमा कराया।’’
ईडी ने कहा कि इस राशि में से नीतेश ने अपने तथा अपने पिता हरीश गहलोत, अपनी मां और बड़े भाई के नाम पर दो फ्लैटों की बुकिंग के लिए दुबई के डेवलपरों को भुगतान किया।