आप के अंदर छिड़े महासंग्राम पर अब पार्टी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी योगेन्द्र-प्रशांत के मसले पर दो गुटों में बंटी दिख रही है, जिस पर पार्टी अब कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहती। इसलिए अब पार्टी के बड़े नेता संजय सिंह खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने प्रशांत भूषण पर करारा हमला किया है।
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संजय सिंह के मुताबिक प्रशांत भूषण ने कहा है कि वो प्रेस कांफ्रेंस कर आम आदमी पार्टी को पर्दाफाश करेंगे। पार्टी के नेता संजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब हमें पता चला कि प्रशांत भूषण ये चाहते थे कि हम दिल्ली के चुनाव हार जाएंगे, हमें महज 20 से 22 सीटें ही मिल पाएंगी तो हम बहुत दुखी थे।
योगेन्द्र यादव जी ने प्रेस कांफ्रेंस की प्रशांत भूषण जी ने बेवजह बयान
जारी किये जो कि अनुशासन के खिलाफ है। हमने ये सोचा था कि हम आंतरिक मामलों
पर कोई भी बात मीडिया में नहीं करेंगे तो ऐसे में मयंक गांधी का ब्लॉग
सामने आ गया। ये बात बेहद गंभीर है।
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संजय सिंह के हमला बोलते ही योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने भी इस बयान
पर पलटवार किया है। योगेन्द्र ने तो यहां तक कह दिया कि हमारे खिलाफ दिल्ली
के विधायकों को एक पत्र साइन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
संजय सिंह के आरोपों पर क्या बोले योगेंद्र यादव
इस मामले पर आरोप झेल रहे योगेन्द्र यादव ने संजय सिंह के बयान का जवाब देते हुए कहा है कि मैं अपने साथियों का आभारी हूं कि उन्होंने पब्लिक में आकर हमारे खिलाफ बयान दिया है।
हां मुझे पता चला है कि दिल्ली के विधायकों को जबरदस्ती हमारे खिलाफ पत्र साइन करने के लिए दिया गया है। मुझे उम्मीद है कि अफवाहों का दौर जल्दी खत्म होगा। पार्टी की अपनी कार्यप्रणाली है और हमारे लोकपाल किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता के खिलाफ आरोपों की जांच करते हैं और वो ही इस काम को देखेंगे।
वहीं एक बार फिर आप सांसद भगवंत मान ने ने कह दिया है कि पार्टी व्यक्तियों से ऊपर है। अगर उन दोनों (प्रशांत-योगेंद्र) ने पार्टी के खिलाफ षडयंत्र किया है तो उन्हें बाहर निकाल देना चाहिए।
प्रशांत भूषण ने किया कुछ यूं पलटवार
वहीं दूसरी ओर संजय सिंह के बयान पर प्रशांत भूषण का कहना है कि देश को सच का इंतजार है और वो जल्द ही सबके सामने आएगा। ये बेहद अच्छी बात है जो आरोप और लोगों के द्वारा लगाए जा रहे थे अब वो मुख्य भूमिका के पार्टी के नेता वही कह रहे हैं। पार्टी जिस पारदर्शिता, स्वराज और उच्च आदर्शों को लेकर बनी थी वो उसके लिए लड़ते रहेंगे।
लगातार गहरा रहे विवाद में अब बीजेपी की नेता शाजिया इल्मी भी कूद पड़ी है। पूर्व आप नेता शाजिया ने कहा है कि क्या वाकई में प्रशांत भूषण जी चाहते थे कि दिल्ली में बीजेपी जीते, और अगर वो लोग (योगेंद्र और प्रशांत भूषण) ये चाहते थे तो वो चुनाव से पहले पत्र लीक कर सकते थे। केजरीवाल प्रशांत गैंग को पार्टी से हटाना चाहते थे जिस वजह ये पूरा मामला हुआ है।
पार्टी के नेता दोनों को निकाल देने की कर चुके हैं सिफारिश
आपको बता दें कि पार्टी के भीतर ये अंदरुनी लड़ाई काफी समय पहले से चली आ रही है। खबर आ रही थी कि विवादों का निपटारा करने के लिए योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण को पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
अब इस तरह से पार्टी का इस मसले पर खुलकर सामने आना इस खबर की पुष्टि भी करता है। इस मामले में हालांकि औपचारिक तौर पर कोई जिम्मेदार पदाधिकारी बोलने से बच रहा है।
इससे पहले पंजाब से आप सांसद भगवंत सिंह मान ने सीधा सपाट लहजे में कहा कि दोनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए, क्योंकि ये दोनों ही पार्टी के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
इन मतभेदों के बाद पार्टी से निकाला जा सकता है इन्हें
फिलहाल पार्टी के बड़े नेता भी मान रहे हैं कि आप दो हिस्सों में बंट गई है। वैचारिक मतभेद इतने गहरे हो गए हैं कि दोनों गुट एक साथ काम नहीं कर सकते।
पीएसी से निकाले जाने के दूसरे महाराष्ट्र के आप नेता मयंक गांधी ने इसका विरोध किया। इसके तत्काल बाद अंजलि दमानिया ने मयंक पर हमला बोला।
आप की राजस्थान व कर्नाटक युनिट में भी विरोध के सुर उठ रहे हैं। भले ही योगेन्द्र इससे पहले कार्यकर्ताओं से इस बात की अपील भी कर चुके थे कि अंदरुनी कलह को खत्म करना चाहिए, लेकिन अब ये मामला इतना साधारण दिखाई नहीं दे रहा है।
आम आदमी पार्टी (आप) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक महीने के आखिर में होने की उम्मीद है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि इसी बैठक में योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के बारे में फैसला लिया जाएगा। इसके अलावा दूसरे कई मसलों पर भी विचार होगा। 28 मार्च को इसकी बैठक बुलाई जा सकती है।
हालांकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केबंगलुरू से वापस होने के बाद ही इसकी आधिकारिक घोषणा होगी। बता दें कि राजनीति मामलों की समित व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद राष्ट्रीय परिषद पार्टी की तीसरी मजबूत इकाई है। इस पर कार्यकारिणी के सदस्यों के चयन की अहम जिम्मेदारी है। परिषद के सदस्यों की संख्या करीब तीन सौ है।