आम आदमी पार्टी (आप) में सतह पर बेशक सुलह-समझौते की कोशिशें चल रही हैं। लेकिन अंदरखाने शह-मात का सियासी खेल चल रहा है। दोनों गुट दमदारी से अपनी चाल चल रहे हैं। नजर राष्ट्रीय परिषद की बैठक पर है।
सूत्रों की मानें तो मंगलवार रात राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के फैसले भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं। इनके जरिये टीम केजरीवाल की कोशिश राष्ट्रीय परिषद में विरोधी गुट पर बढ़त हासिल करने की है।
दरअसल, पीएसी से निकाले जाने के बाद योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण खेमा कार्यकर्ताओं से सीधी बात कर रहा है। इसमें आम कार्यकर्ताओं की दुखती रग दबाई जाती है। सीधा सवाल यही होता है कि पार्टी फिलहाल उनसे संवाद कर रही है या नहीं।
मंगलवार को अरविंद केजरीवाल को भेजी गई चिट्ठी में योगेंद्र और प्रशांत भूषण ने एक बार फिर दोहराया है कि पार्टी में कार्यकर्ताओं को सम्मान मिले। दूसरे राज्यों में पार्टी विस्तार व पारदर्शिता की बात कही है।