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जब-जब मुसीबत में फंसी है 'आप', बचने के लिए 7 बार किया है एक ही काम

Thu, 11 May 2017 02:50 PM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमर उजाला विशेष :आप सरकार के  हर संकट पर विधानसभा का विशेष सत्र       
हेड 
कुछ कहता है दिल्ली विस का विशेष सत्र      

मई, 2015 से मई, 2017 तक विस के सात विशेष सत्र, हर बार टारगेट पर प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार, उपराज्यपाल      
पांच विशेष सत्र सिर्फ एक-एक दिन के, विस सचिव के स्थानांतरण पर भी हुआ था विशेष सत्र      
विशेष सत्र में नहीं हुआ प्रश्नकाल, कई आयोग और समिति बनाई, कई संकल्प और प्रस्ताव पास      
 
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी सरकार पर जब-जब किसी तरह के संकट के बादल आए तो विधानसभा के विशेष सत्र से उसे दूर करने की कोशिश की गई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली कैबिनेट ने पिछले दो साल में सात बार विशेष सत्र बुलाया।
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इन सत्रों में प्रश्नकाल नहीं हुआ। हर बार केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल पर हमले करके कुछ प्रस्ताव पास किए और कुछ जांच आयोग व समिति गठित की। सदन में टेप चलाने, ईवीएम गड़बड़ी डेमो के अलावा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री पर आरोप भी इन्हीं सत्रों में लगाकर जांच की मांग रखी गई।

नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता टैंकर घोटाले की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर भी इन्हीं में से एक सत्र के दौरान सदन की टेबल पर चढ़े थे। विशेष सत्र के शुरुआत की बात करें तो कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले से हुई जब 26 मई 2015 को केंद्र सरकार की 21 मई, 2015 वाली सेवा से जुड़े मामलों पर उपराज्यपाल को अधिकार देने वाली अधिसूचना पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी।
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यहां तक कि एक दिन का विशेष सत्र विस सचिव सूर्यकुमार देवड़ा का स्थानांतरण, कालेधन से उत्पन्न स्थिति और प्रधानमंत्री पर आरोप पर एक दिन और अब ईवीएम का डेमो देने के लिए एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया। विशेष सत्र में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भाजपा के बड़े नेताओं के खिलाफ रिकॉर्डिंग सदन में सुनाई।

कब-कब विशेष सत्र और क्यों बुलाया गया      

- फोटो : pti
26 मई 2015 दो दिन : मुख्य सचिव की नियुक्ति पर उपराज्यपाल से टकराव की वजह बनी केंद्र सरकार की 21 मई, 2015 की अधिसूचना पर चर्चा केलिए बुलाई गई।
3 अगस्त, 2015 : दिल्ली पुलिस पर हमले और एसीबी छीने जाने पर चर्चा के लिए बुलाई गई। प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस पर खूब बरसेेे।      
-22 दिसंबर, 2015 : मुख्यमंत्री कार्यालय और राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई छापेमारी का निंदा प्रस्ताव पास किया। 
9 जून, 2016: तीन दिन का:  उपराज्यपाल नजीब जंग के खिलाफ दो जांच आयोग गठित करने के अलावा एमसीडी में भ्रष्टाचार की जांच के लिए कमेटी गठित। 
9 सितंबर, 2016 : इस सत्र में विस के सचिव सूर्यकुमार देवड़ा के स्थानांतरण मामले को विधानसभा अध्यक्ष का अधिकार क्षेत्र और विशेषाधिकार पर चर्चा करके प्रस्ताव पास हुआ। 
15 नवंबर, 2016 : नोटबंदी पर चर्चा करके इसकी जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में कराने का संकल्प पास।      
9 मई, 2017  : ईवीएम में छेड़छाड़ का लाइव डेमो देने के लिए जिसमेें प्रस्ताव भी पास किया गया।
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विशेष सत्र का बदल दिया मतलब : एसके शर्मा      

- फोटो : pti
दिल्ली विस के पूर्व सचिव एसके शर्मा का कहना है कि बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र लोकसभा और किसी भी विस के लिए अनिवार्य होता है। विशेष सत्र को आपातकालीन सत्र भी कहते हैं जो जीवट (अच्छे कार्य) में शामिल होने के लिए बुलाते हैं या फिर आपात स्थिति के लिए।

पुरानी भाजपा सरकार में कोई विशेष सत्र नहीं हुआ। शीला दीक्षित सरकार में तीन विशेष सत्र हुए। पहला बसों में सीएनजी की अनिवार्यता और दूसरा रिहायशी इलाकों से प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री बाहर शिफ्ट करने और तीसरा पूर्ण राज्य का दर्जा देने वाला प्रस्ताव पास करने के लिए किया गया।

नई सरकार ने विशेष सत्र को अधिकार क्षेत्र वाले प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल, चुनाव आयोग को गाली देने वाला सत्र बना दिया है। ऐसा विस के विशेषाधिकार का फायदा उठाने के लिए करते हैं। यहां किसी को गाली दे दो या अन्य तरह के आरोप लगा दो मानहानि या अन्य मुकदमा नहीं होता। 
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