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बजट में नए प्रयोगों से AAP ने फिर साधा चुनावी लक्ष्य, पाना चाहती है 'ऐसी' सरकार का टैग

Thu, 09 Mar 2017 11:12 AM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बजट पेश करने पहुंचे स‌िसोद‌िया - फोटो : अमर उजाला
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भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने तीसरे बजट में भी पुरानी लाइन लैंथ कायम रखी है। आम आदमी पार्टी दिल्ली नगर निगम चुनाव में किस्मत आजमाने उतर चुकी है, इसी कड़ी में उसने नए प्रयोगों, शून्य कर बजट व नगर निगम बजट 14.9 फीसदी बढ़ाकर वोटरों का रिझाने के अलावा नगर निगम की सत्ता में आने का भरोसा भी जताया है। एमसीडी वोटरों को साधने के लिए बजट में काफी कुछ चुनावी घोषणा पत्र की तरह लग रहा है।
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पिछले लोकसभा चुनाव व पंजाब विधानसभा चुनाव सहित अन्य राज्यों के प्रचार में आम आदमी पार्टी दिल्ली की सरकार को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करती रही है। उसका दावा रहा है कि वे देश की राजनीति बदलने आए हैं और काफी कुछ ऐसा है जोकि पहली बार कोई राज्य सरकार जनता के लिए नए प्रयोगों के साथ कर रही है।

इस बार के बजट में भी उसने नए प्रयोगों व पहली बार करने वाली सरकार का टैग कायम रखने की कोशिश की है। इसी कड़ी में बजट पेश करते समय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने आउट कम बजट पेश करने वाला पहला राज्य होने का दावा किया।
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घोषणाएं पहली बार करने वाली सरकार का टैग कायम करना चाहती है आप

बजट पेश करने पहुंचे स‌िसोद‌िया - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा सरकारी स्कूल में नर्सरी शुरू करने, मकान बनाने की लागत कम करने व छोटे नगरों की कनेक्टिविटी के लिए एटीएफ के टैक्स में छूट कर उड़ानों को सस्ता करने व बिजली सस्ती व पानी फ्री की घोषणा की है।

यही नहीं वृद्धा, दिव्यांग, विधवा पेंशन 1000 रुपये की जगह 2500 करने, न्यूनतम मजदूरी 13350 रुपये करने, गेस्ट टीचर्स की सैलरी सौ फीसदी तक बढ़ाने, इस साल अंत तक सभी को पाइप लाइन से पेयजल उपलब्ध कराने, पांच हजार नए टॉयलेट, पांच हजार झुग्गी वालों को घरों में शिफ्ट करना, दिल्ली को स्लम फ्री करने, दस हजार ऑटो परमिट जारी करने सहित उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया के बजट भाषण में कई घोषणाएं ऐसी रहीं जोकि बजट को चुनावी घोषणापत्र जैसा दर्शाती रहीं। इतना ही नहीं बीस कॉलोनियों में छठ घाट बनाने की बात कहकर उन्होंने प्रवासियों के एक बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की। 

दरअसल, आगामी माह में दिल्ली नगर निगम के चुनाव के वोट पड़ने हैं। दिल्ली के तीनों नगर निगम पर भाजपा सत्ता में है। ऐसे में निगम का शेयर बढ़ाने के अलावा नगर निगम के वोटरों को साधने की कोशिश तो हुई है, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवहन पर 47 फीसदी बजट लोगों को समझाने में आसानी देगा।

आउटकम बजट के फायदे भी वित्त मंत्री ने गिनाकर उसे भुनाने की कोशिश की। हालांकि इस सरकार के निर्णयों में महिला सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने, पर्यावरण बचाने को कारों को ऑड- ईवन नंबरों के आधार पर चलाने के फैसलों पर सवाल उठते रहते हैं।
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