दिल्ली सरकार उसकी मदद करने के लिए उसे दिए गए ऋण का ब्याज भी नहीं ले रही है। इस तरह नगर निगम में बड़े पदों पर नियुक्त भाजपा के पार्षद लगातार झूठ बोल रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नगर निगम पर 35 सौ करोड़ रुपये की देनदारियां हैं, वहीं उसके डीडीए से नौ सौ करोड़ रुपये और दक्षिण दिल्ली नगर निगम से 13 सौ करोड़ रुपये बकाया है।
मगर नगर निगम इन एजेंसियों से पैसा नहीं ले रही हैं और वह जानबूझकर दिल्ली सरकार से पैसा मांगती है, जबकि नगर निगम की दिल्ली सरकार की ओर कोई लेनदारियां नहीं बनती हैं।
भाजपा पार्षद केवल राजनीति करने के लिए ही दिल्ली सरकार से पैसा मांगते है। भाजपा को इस तरह की राजनीति करना भविष्य में महंगा पड़ेगा।