एमसीडी सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी, बाद में दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी की सदन बैठक में मंगलवार को आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) और कॉन्ट्रेक्ट फील्ड वर्कर्स (सीएफडब्ल्यू) कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों की मांगों और उनके साथ हो रहे अन्याय को लेकर नारेबाजी की और तख्तियां लहराई। उनके शांत नहीं होने पर महापौर राजा इकबाल सिंह को एक बार बैठक 10 मिनट तक स्थगित करनी पड़ी। पुन: बैठक शुरू होने पर सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच अनेक मामलों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।
बैठक में आते ही आप पार्षदों ने डेंगू-मलेरिया नियंत्रण में लगे डीबीसी व अन्य कर्मचारियों के हक में नारेबाजी शुरू की। इस कारण बैठक की कार्यवाही बाधित हो गई। महापौर ने उनको कई बार शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वह नारेबाजी करते रहे। इस दौरान आप पार्षदों ने कहा कि मच्छर योद्धा कहलाने वाले ये कर्मचारी कई दिनों से अपनी जायज मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं और सिविक सेंटर के समक्ष धरना दे रहे है, लेकिन एमसीडी प्रशासन और सत्ता पक्ष उनकी सुध नहीं ले रहा। हंगामा बढ़ने पर महापौर राजा इकबाल सिंह को कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
बैठक दोबारा शुरू होने पर आप के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों के दम पर दिल्ली डेंगू-मलेरिया से सुरक्षित रहती है, वही आज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि मच्छर जनित बीमारी से किसी की मौत हुई तो उसकी जिम्मेदारी भाजपा और महापौर पर होगी। इस बीच महापौर ने सदन में बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो 24 घंटे में अपनी रिपोर्ट देगी। इस घोषणा के बाद विपक्षी पार्षद शांत हुए, लेकिन बहस का दौर जारी रहा।
इस मौके पर भाजपा के कई पार्षदों ने आप पार्षदों पर सदन का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। वहीं आप पार्षदों ने पलटवार करते हुए कहा कि जब कर्मचारियों की आवाज सदन में नहीं सुनी जाएगी, तो वह सड़क पर गूंजेगी। उधर, सिविक सेंटर के सामने डीबीसी और सीएफडब्ल्यू कर्मचारी नारे लगाते हुए अपनी मांगों पर अडिग रहे।