दिल्ली सरकार में आम आदमी पार्टी अपनी दूसरी पारी में बदली-बदली सी नजर आ रही है। शपथ ग्रहण समारोह में गाड़ी-बंगले से दूरी खत्म करने की घोषणा करके इरादा साफ कर दिया था। विभाग की वेबसाइट्स पर मंत्रियों की फोटो भी लग गई है। अब पार्टी के लोगों को सरकार में कंसल्टेंट के तौर पर नियुक्ति के अलावा विधायकों को बड़े स्तर पर काम पर लगाने की तैयारी चल रही है। सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार करने की बजाय फैसलों पर उसका पालन भी कर रहे हैं।
क्या दिखे बदलाव
1. विभागों की वेबसाइट पर सजी मंत्रियों की फोटो
आम आदमी पार्टी ने पिछली सरकार में उनसे संबंधित विभागों की वेबसाइट पर फोटो डालने की मनाही की थी, इस बार ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री समेत सभी विभागों की साइट पर मंत्रियों की फोटो डाली गई है। इस पर मंत्री विभागों पर जाकर झापेमारी की बजाय ऑफिस में बैठकर प्रक्रिया को समझने की कोशिश भी कर रहे हैं।
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2. सरकारी प्रक्रियाओं का हो रहा है पालन
अरविंद केजरीवाल मंत्रिमंडल ने पिछली बार स्वराज कानून या लोकपाल बिल पेश करने केलिए सरकारी प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए उसे पेश व पास करने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं कई स्तर पर जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किए एफआईआर दर्ज करने केअलावा कई अन्य फैसले भी लिए थे, इस बा ऐसा नहीं है। कोशिश की जा रही है कि कैबिनेट में पास करने के बाद किए जाएं।
70 प्वाइंट पर फोकस कर रहे हैं अधिकारी, नहीं हटाए अधिकारी
3. सरकारी अनुभव वालों की बजाय एक्सपर्ट को कंसल्टेंट केजरीवाल सरकार ने पिछले कार्यकाल में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव व कुछ अन्य सरकारी अनुभव वालों को सरकार में कंसल्टेंट बनाया था, इस बार पार्टी से जुड़े आशीष खेतान को दिल्ली डॉयलॉग कमीशन का उपाध्यक्ष बनाया तो आशीष तलवार को कंसल्टेंट बनाया। इसकेअलावा कई अन्य को अलग-अलग स्तर पर लगाने की तैयारी है।
4. सत्ता में विधायकों की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी पुरानी सरकार में मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव होते थे, केजरीवाल की सरकार में सभी मंत्रियों के पास कई-कई संसदीय सचिव लगाने की तैयारी की है। इसमें आदर्श शास्त्री, मदन लाल, अल्का लाम्बा, जनरैल सिंह, सरिता सिंह, संजीव झा, नितिन त्यागी, प्रवीन देशमुख जैसे विधायकों समेत 15 को लगाया जाएगा। इसके अलावा डीडीए में एसके बग्गा और सोमनाथ भारती, जलबोर्ड में कपिल मिश्रा और प्रकाश, ग्रामीण विकास बोर्ड में रघुवेन्द्र शौकीन, डीएसआईआईडीसी में सोमदत्त तो यमुनापार विकास बोर्ड, डीटीटीडीसी समेत कई अन्य जगह मौका देने की सूरी तैयार है।
5. सत्तर प्वाइंट एजेंडा है फोकस, समय सीमा नहीं आप सरकार ने सभी विभागों को 70 प्वाइंट एजेंडा पर काम करने का टारगेट दिया है। अधिकारियों से एक्शन प्लान मांगे थे लेकिन यह भी साफ किया है कि जो कुछ बदलाव की जरूरत है, उस रास्ते को बताएं। ऐसा नहीं है कि सरकार प्रक्रिया को दरकिनार करके वादे पूरे करने का दवाब अधिकारियों पर हो।