अक्तूबर में हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली विधानसभा की अवधि फरवरी में खत्म हो रही है। ऐसे में चुनाव आयोग दिल्ली विधानसभा का चुनाव तीनों राज्यों के साथ करवा सकता है।
ऐसी स्थिति में आप के हरियाणा में भी चुनाव लड़ने से संगठन की ताकत बंटेगी और सियासी रणनीति के हिसाब से यह फैसला नुकसानदेह हो सकता है।
तीनों राज्यों के साथ चुनाव न होने की हालत में भी अगर हरियाणा में आप चुनाव लड़ती है और परिणाम अपेक्षा की अनुरूप नहीं आता तो इसका असर दिल्ली के चुनावों पर भी पड़ सकता है।
पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को इसका बुरा अनुभव भी रहा है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद हुए दिल्ली एमसीडी चुनाव में आप की करारी शिकस्त हुई। इसकी एक वजह पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली हार थी।