फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा के चुनावी मैदान से कदम खींच सकती है आप, पीएसी में चर्चा

Wed, 10 Jul 2019 06:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल - फोटो : File Photo
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव के दौरान बेशक कांग्रेस व आप के बीच हरियाणा के मसले पर ही सियासी समझौता नहीं हो सका था लेकिन आप हरियाणा विधानसभा के चुनावी मैदान से अपने कदम पीछे खींच सकती है। 

विज्ञापन


मंगलवार शाम पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में इस पर चर्चा हुई। पार्टी सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को देखते हुए अधिकतर नेता हरियाणा विधानसभा चुनाव को आप के लिए घाटे का सौदा मान रहे हैं। हालांकि अभी इस मसले पर पार्टी में आखिरी फैसला नहीं हुआ है। 

इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा की वजह से कांग्रेस व आप के बीच गठबंधन नहीं हो सका था। कांग्रेस जहां सिर्फ दिल्ली में आप से गठबंधन करना चाहती थी, वहीं आप बगैर हरियाणा के कांग्रेस से गठबंधन को तैयार नहीं थी। नामांकन शुरू होने तक दोनों दलों के बीच गठबंधन पर कयास लगते रहे। लेकिन आखिर में दोनों के बीच बात नहीं सकी। 
विज्ञापन


ऐसे में आप व जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने मिलकर चुनाव लड़ा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, हरियाणा के प्रभारी गोपाल राय और दिल्ली के आप विधायकों समेत कई बड़े नेताओं ने हरियाणा में ताकत झोंकी।  बावजूद आप के तीनों उम्मीदवारों को बहुत कम वोट मिले। 

लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी नेतृत्व ने हरियाणा की स्थिति पर आंतरिक समीक्षा कराई। इसमें रिपोर्ट नकारात्मक रही। इसके बाद पीएसी की बैठक में इस मसले पर चर्चा हुई। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ना ठीक नहीं है। 

जबकि हरियाणा प्रदेश इकाई की दलील है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे की तुलना विधानसभा चुनाव से नहीं की जा सकती। पार्टी को इस पर आखिरी फैसला लेने से पहले अभी आगे भी विचार करना चाहिए। ऐसे में तय किया गया कि अगली बैठक में इस मामले में पार्टी अपना फैसला सुनाएगी।
 

विज्ञापन

पार्टी की सियासी रणनीति में फिट नहीं बैठ रहा हरियाणा

अक्तूबर में हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली विधानसभा की अवधि फरवरी में खत्म हो रही है। ऐसे में चुनाव आयोग दिल्ली विधानसभा का चुनाव तीनों राज्यों के साथ करवा सकता है।

ऐसी स्थिति में आप के हरियाणा में भी चुनाव लड़ने से संगठन की ताकत बंटेगी और सियासी रणनीति के हिसाब से यह फैसला नुकसानदेह हो सकता है। 

तीनों राज्यों के साथ चुनाव न होने की हालत में भी अगर हरियाणा में आप चुनाव लड़ती है और परिणाम अपेक्षा की अनुरूप नहीं आता तो इसका असर दिल्ली के चुनावों पर भी पड़ सकता है।

पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को इसका बुरा अनुभव भी रहा है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद हुए दिल्ली एमसीडी चुनाव में आप की करारी शिकस्त हुई। इसकी एक वजह पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली हार थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें