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'त्रिलोकपुरी में हिंसा की जिम्मेदार है बीजेपी'

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दिल्ली के त्रिलोकपुरी में हुई सामुदायिक हिंसा के बाद कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसके लिए भाजपा को दोषी ठहराया है। इन नेताओं का आरोप है कि बीजेपी त्रिलोकपुरी इलाके में चुनाव के दौरान एक पक्ष विशेष के मतों को हासिल करने के लिए ऐसा कर रही है।
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बता दें कि त्रिलोकपुरी का ये इलाका एक पुनर्वासित कालोनी है। इस क्षेत्र पर 2008 तक कांग्रेस का कब्जा था। 2008 विधानसभा चुनाव में बीजेपी यह सीट मामूली अंतर से जीत गई थी। साल 2013 के चुनाव में यहां आप के नेता राजू ने दलित वोटों के कारण बड़े अंतर से यहां चुनाव जीता था।

यह क्षेत्र दलित बहुल है, जहां दलितों की 80 प्रतिशत आबादी रहती है। मुस्लिमों की आबादी यहां 15 प्रतिशत है जबकि बची 5 प्रतिशत आबादी जाट और भैरो समुदाय की है।
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'एक बीजेपी नेता ने भड़काई हिंसा'

शनिवार को त्रिलोकपुरी में हिंसा भड़क उठने के बाद आप और कांग्रेस ने बीजेपी, आरएसएस और बजरंग दल पर इस हिंसा का आरोप मढ़ा है।

आप विधायक राजू ने कहा कि हर बार जब हिंसा कम होती बीजेपी कार्यकर्ता स्थानीय लोगों के पास पहुंचकर लोगों को भड़काने लगते थे।

राजू आगे कहते हैं कि इस क्षेत्र के लोगों ने दिसंबर में वोट देकर आप को को जिताया था। अब बीजेपी कोशिश कर रही है कि वो दलित वोटों को अपने पक्ष में कर सके जैसे उसने यूपी में किया।

कांग्रेस नेता हरनाम सिंह जिन्होंने 2013 में यहां से चुनाव लड़ा था, आरोप लगाते हैं कि यहां हो रही हिंसा बीजेपी के एक नेता की वजह से भड़की है।
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'कांग्रेस के साशन में यहां कभी नहीं हुए दंगे'

हरनाम बताते हैं कि, वह बीजेपी नेता त्रिलोकपुरी में तकरीबन दोपहर दो बजे आया और एक हिंदू समूह के लोगों ने हर-हर महादेव के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद वहां की स्थिति और बिगड़ गई। दो घंटे बाद वो नेता वापस आया और दोबारा वहां हिंसा शुरू हो गई।

पूर्वी दिल्ली के सांसद महेश गिरी ने कहा कि दिवाली का समय था और मैंने एसएचओ को स्थिति को नियंत्रण में लाने को कहा। हालांकि हालात बिगड़ गए जब एक मुस्लिम युवक ने रास्ते में कुछ फेंका और वहां पत्थरबाजी शुरू हो गई।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि इस इलाके में उनके शासनकाल में कभी कोई सामुदायिक हिंसा नहीं हुई। हमारी सरकार के दौरान केवल दो जगहें थीं जहां हिंसा हुई और जिन्हें सामुदायिक हिंसा कह सकते हैं और वो हैं बाटला हाउस और जोर बाघ करबला। ऐसी स्थितियों में सरकार और पुलिस के लिए जरूरी हो जाता है।

साभारः इंडियन एक्सप्रेस
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