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उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने का विरोध: सड़क पर उतरे केजरीवाल, कहा- जनता का हक दिलाने तक जारी रहेगी लड़ाई

Wed, 17 Mar 2021 07:51 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने पर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच तकरार बढ़ी, दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पार्टी ने किया प्रदर्शन...
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उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अरविंद केजरीवाल आंदोलन की राजनीति से पैदा हुए राजनेता हैं। उन्हें जब भी किसी समस्या का समाधान व्यवस्था के पारंपरिक तरीकों में दिखाई नहीं पड़ता, वे सड़कों पर उतर जाते हैं। अब जबकि केंद्र सरकार संसद में कानून बनाकर उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने का काम कर रही है, अरविंद केजरीवाल एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं।

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केजरीवाल ने बुधवार को जंतर-मंतर पर पार्टी के एक प्रदर्शन में भाग लिया और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक चुनी हुई सरकार की ताकत को कमजोर कर पर्दे के पीछे से सत्ता हथियाने का प्रयास है। लेकिन वे इस कोशिश को सफल नहीं होने देंगे और जनता के दरबार में इसके विरोध में लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि कानून में बदलाव होने के बाद भी जनता को दी जा रही योजनाएं चलती रहेंगी और लोगों की भलाई के काम होते रहेंगे।

पूरे देश में प्रदर्शन की रणनीति

आम आदमी पार्टी उपराज्यपाल के मुद्दे को पूरे देश में भुनाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने के मुद्दे पर बुधवार को लखनऊ में भी आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के अनुसार इसी तरह के प्रदर्शन की तैयारी गुजरात और उत्तराखंड में भी की जा रही है। आने वाले दिनों में जहां भी पार्टी के कार्यकर्ता मजबूत स्थिति में हैं, वहां पर इसी तरह के धरने-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी इस कानून का संसद में विरोध कर ही रही है। अगर यह प्रस्ताव संसद से पास होकर राष्ट्रपति के पास जाता है तो पार्टी उनसे भी अपील करेगी कि वे इस पर हस्ताक्षर न करें। इसके बाद पार्टी इस मामले की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ेगी।

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पार्टी नेता के अनुसार दिल्ली सरकार की योजनाओं का आदर्श ही जनता के सामने रख पार्टी आगे बढ़ने की रणनीति पर चल रही थी। इससे पार्टी को सफलता भी मिल रही थी। लेकिन उपराज्यपाल की शक्तियों में परिवर्तन के बहाने दिल्ली सरकार की योजनाओं को रोकने की कोशिश की जाएगी, तो आम आदमी पार्टी केंद्र के इस विरोध को ही अपनी ताकत बनाएगी और पूरे देश में लोगों को बताएगी कि किस प्रकार एक चुनी हुई सरकार को जनता की भलाई का काम नहीं करने दिया जा रहा है।

कांग्रेस ने भी किया प्रदर्शन

दिल्ली के सभी राजनीतिक दल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी, दोनों ही इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की बात अपने घोषणा पत्र के जरिए रखते रहे हैं। लेकिन अब जब कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल की शक्तियों में बढ़ोतरी कर दिल्ली की ताकत को और कमजोर करने का काम कर रही है, भाजपा अचानक उसके समर्थन में आ गई है।

लेकिन कांग्रेस ने एक बार फिर जंतर-मंतर पर पहुंचकर आंदोलन किया और इसे लोकतंत्र विरोधी कदम बताया। पार्टी के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने कहा कि यह एक चुनी हुई सरकार की ताकत को कम करने के साथ ही जनता के वोट की ताकत को भी कम करने का प्रयास है। यह सब कुछ अपने हाथों में लेने के केंद्रीय शासन की ओर इशारा करता है और कांग्रेस पार्टी ऐसी किसी भी सोच का पूरी तरह विरोध करती है।

अपनी कमजोरी न छिपाएं अरविंद केजरीवाल

जो भाजपा अपने घोषणा पत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की वकालत करती थी, अब अचानक ही वह उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ाने का समर्थन कर रही है। पार्टी की सोच में यह परिवर्तन क्यों आया? इस सवाल पर दिल्ली प्रदेश भाजपा की प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ कहती हैं कि अरविंद केजरीवाल हमेशा अपनी नाकामी का कोई बहाना खोजने की कोशिश करते रहते हैं। इस बार भी वे वही कर रहे हैं। उनके छह सालों के शासन में दिल्ली की जनता ने देख लिया है कि वे बेहद अक्षम मुख्यमंत्री साबित हुए हैं।

दिल्ली दंगों को रोकने की कोशिश हो या लोगों को कोरोना के संकट से बचाने का मामला, हर जगह केंद्र सरकार की दखल के बाद लोगों को राहत मिल पाई है। ऐसे में अगर दिल्ली उनके भरोसे छोड़ दी जाएगी तो यह स्वयं दिल्ली के लोगों के ही हित में नहीं होगा। उपराज्यपाल के मजबूत होने से दिल्ली के विकास का रास्ता खुलेगा।

नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि आज अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन जब दिल्ली नगर निगमों के मेयर और पार्षद उनके दरवाजे पर 24 दिनों तक धरना-प्रदर्शन करते रहे, निगमों के लिए फंड की मांग करते रहे, तब उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी और वे अपने आवास से निकलकर उनसे मिलने तक नहीं आए। इससे साफ होता है कि उन्हें केवल सड़क पर प्रदर्शन करना ही आता है, लेकिन प्रदर्शन की गरिमा को बनाए रखना नहीं आता। केजरीवाल को इन हरकतों से हटकर दिल्ली के विकास पर अपना ध्यान केंदित करना चाहिए।

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