उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल की सरकार आई तो दिल्ली का बजट 25 हजार करोड़ रुपये था। छह सालों के भीतर दिल्ली का बजट लगभग 70 हजार करोड़ रुपये हो गया है। यह सब दिल्ली वालों ने किया है। हमने किसी राज्य व केंद्र सरकार और कही अन्य से एक रुपया कर्जा नहीं लिया है। यह पैसा दिल्ली वालों ने टैक्स के माध्यम से दिया है।
उपराज्यपाल को एमसीडी के बुरे हालात की वजह बताते हुए दुर्गेश पाठक ने कहा कि इसके लिए दिल्ली वाले जिम्मेदार नहीं हैं। हम दिल्ली वाले तो उनको बहुत टैक्स देते है, लेकिन भाजपा शासन में एमसीडी ने डेंगू की दवा 3600 रुपये किलो के हिसाब से खरीदी है, वहीं भोपाल की नगर निगम ने महज 2400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा है। कूड़े की सफाई के लिए ट्रोमा मशीन खरीदी गई जिसका बाजार भाव 17 लाख रुपये है, लेकिन एमसीडी उसी मशीन के लिए 19 लाख रुपये प्रति महीने के हिसाब से किराया दे रही है। बच्चों की किताब खरीदने व हाउस टैक्स में भ्रष्टाचार हुआ है।
उन्होंने कहा कि गांधी मैदान पार्किंग, शिवा मार्केट की पार्किंग, कुतुब रोड पार्किंग, नोवेल्टी सिनेमा, नानी वाला बाग, मोती नगर का शॉपिंग कांपलेक्स, डिलाइट सिनेमा के पास 22 दुकान, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में 132 प्लॉट, करोल बाग के पांच शॉपिंग कांपलेक्स पार्किंग, शालीमार बाग के स्कूल की पार्किंग, 34 स्कूलों की बिल्डिंगों को कोचिंग सेंटरों, निजी अस्पतालों की खाली जमीन, दिल्ली की हेरिटेज बिल्डिंग टाउन हॉल, आरबीटीबी हॉस्पिटल की खाली जमीन बेच दी है। वहीं उपराज्यपाल दिल्ली वालों को चोर बता रहे है। उपराज्यपाल के लिए ऐसी भाषा शोभा नहीं देती है। इस तरह की भाषा बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। दिल्ली वाले यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।