संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के ग्रीष्मकालीन रंगमहोत्सव के अंतर्गत अभिमंच सभागार में मोहन राकेश के कालजयी नाटक ‘आधे अधूरे’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति के बीच प्रस्तुत इस नाटक ने आधुनिक भारतीय परिवारों के भीतर मौजूद भावनात्मक तनाव, संबंधों की जटिलताओं और अधूरी आकांक्षाओं को संवेदनशीलता के साथ सामने रखा। प्रख्यात रंग निर्देशक स्वर्गीय त्रिपुरारी शर्मा द्वारा निर्देशित यह नाटक भारतीय रंगमंच की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में माना जाता है। इसकी केंद्रीय पात्र सावित्री अपने परिवार और जीवन में स्थिरता तथा पूर्णता की तलाश में निरंतर संघर्ष करती है।