दुष्कर्म संबंधी कानून का इस्तेमाल शादी का वादा पूरा करवाने के औजार के तौर पर नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आरोपी को बरी करते हुए की है।
मामले में बरी हुए शख्स पर एक विधवा से दुष्कर्म करने का आरोप था। वह महिला आरोपी के साथ लिव इन रिलशेन में रहती थी।
अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए कहा महिला के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि वह बिना शादी किए आरोपी के साथ क्यों रहने लगी जबकि उनकी शादी में कोई रुकावट नहीं थी।
कड़कड़डूमा जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरिता बीरबल ने आरोपी को दुष्कर्म व बंधक बनाने, धमकी देने संबंधी आरोपों से बरी कर दिया।