नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली पहुंचे कुछ किसानों के साथ उनके बच्चे भी शामिल हैं। कोरोना की वजह से ज्यादातर बच्चों के स्कूल तो बंद हैं, लेकिन उनकी ऑन लाइन क्लास जारी हैं। वहीं सिंघु बार्डर पर भीड़ अधिक होने की वजह से मोबाइल फोन का इंटरनेट न के बराबर ही काम कर रहे है। ऐसे में बच्चों की ऑन लाइन क्लास की समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली के एक समाजसेवी ने सिंघु बार्डर के कुछ हिस्से में फ्री-वाईफाई की व्यवस्था की है।
समाजसेवी ने अपने वाईफाई का नाम (यूजर आईडी) और उसका पासवर्ड लिखकर उसके उसके बोर्ड लगाए हुए हैं। अब किसानों के बच्चे इस वाईफाई का फायदा उठाकर अपनी क्लास भी कर पा रहे हैं। वसंतकुंज के एक समाजसेवा अभिषेक जैन ने बताया कि उनका यह प्रयोग स्लम एरिया में भी कामयाब रहा था। झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए वह पहले वसंत विहार के नेपाली कैंप और भंवर सिंह कैंप में फ्री-वाईफाई लगवा चुके थे।
किसान आंदोलन में वह जब हिस्सा लेने पहुंचे तो उन्होंने इंटरनेट की हालत को देखकर यहां भी वाईफाई का इंतजाम करने की सोची और वह अपनी इस मुहीम में कामयाब हो गए। अभिषेक ने बताया कि बार्डर पर लोकल इंटरनेट प्रोवाइडर की मदद से वह अपना वाईफाई चलवा पा रहे हैं। सिंघु बार्डर पर ही आगे बड़े एरिया को कवर कर वहां भी वाईफाई का इंतजाम करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी ओर शामली से आए 15 वर्षीय करणदीप सिंह और 20 वर्षीय कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने ट्रैक्टर पर चार्जिंग जंक्शन लगाया हुआ है। ट्रैक्टर की बैटरी से इंवर्टर चलाकर चार्जिंग के लिए प्वाइंट बनाए हुए हैं। एक समय में 20 मोबाइल को चार्ज करने की सुविधा है। जिसके पास मोबाइल का चार्जर न हो उसके लिए चार्जर का भी इंतजाम किया गया है। बैटरी डाउन होने पर ट्रैक्टर को स्टार्ट कर दोबारा बैटरी को चार्ज कर लिया जाता है।