फीस रेग्युलेटरी एक्ट लागू होने के बाद भी अभिभावकों की जेब को राहत नहीं मिली है। कुछ स्कूलों ने फीस (ट्यूशन फीस) तो कम की, लेकिन अन्य मदों में पैसे बढ़ाकर भरपाई कर ली। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलाें ने चालाकी दिखाते हुए सिर्फ नर्सरी कक्षा के छात्रों की फीस में कटौती की है या फिर उन अभिभावकोें के बच्चों की फीस कम की है, जिन्होंने जिला स्तर की फीस रेग्युलेटरी कमेटी को शिकायत की थी।
स्कूल फीस कम करने का मेसेज भी सिर्फ दिखावे के लिए भेज रहे हैं। स्कूलाें के मनमाने रवैये को देखते हुए ऑल नोएडा स्कूल पैरंट्स एसोसिएशन स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहा है। इसमें सामने आया है कि स्कूलों ने अभिभावकों से पिछले तीन सालों में 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले हैं।
फीस रेग्युलेटरी एक्ट लागू हुए करीब एक साल हो गया है, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है। इसलिए अभिभावक खुद ही स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे हैं। इसमें पिछले तीन सालों में स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का आंकड़ा, फीस, पिछले तीन सालों में स्कूलों ने कितन प्रतिशत फीस बढ़ाई, शिक्षकों के वेतन में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इन सभी की जानकारी लेकर एसोसिएशन रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहा है। अभिभावकों का कहना है कि इससे स्कूलों का झूठ सबके सामने आएगा।
ऑल नोएडा स्कूल पैरंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना ने बताया कि जिले में 168 सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल हैं। ये सभी फीस रेग्युलेटरी एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं। अब तक का आंकड़ा निकाला जाए तो पिछले तीन सालों में इन स्कूलों ने अभिभावकों से करीब 200 करोड़ अतिरिक्त रुपये वसूले हैं।
अभी कुछ स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है। इसमें सामने आया है कि एक बड़े स्कूल के आंकड़ों के अनुसार उसने पिछले तीन साल में 27 करोड़ रुपये ज्यादा लिए हैं। वहीं एक अन्य स्कूल ने 7 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले हैं।
जिला फीस कमेटी के सदस्यों की बैठक
एसोसिएशन के अनुसार अभी तक 17 स्कूलों की शिकायत डिस्ट्रिक्ट फीस रेग्युलेटरी कमेटी के पास जा चुकी है। इसको लेकर कमेटी की आंतरिक मीटिंग हुई है। जिला विद्यालय निरीक्षक पी के उपाध्याय ने बताया कि कमेटी की बैठक में आगे की रणनीति तय की गई है। स्कूलों के खिलाफ जिन अभिभावकों ने शिकायत की है उनकी और स्कूल प्रबंधकों के साथ जल्द ही मीटिंग होगी।