संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के बाहर मरीजों और तीमारदारों की मजबूरी अब उनके लिए खतरा बनती जा रही है। अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर खुले में बिक रहा खाना संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। कटे फल, खुले जूस और बिना ढके खाद्य पदार्थ धूल, धुएं और मक्खियों के बीच बेचे जा रहे हैं, जिससे लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है।
सस्ता खाना, मजबूरी का सहारा
दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजन सस्ता खाना मिलने के कारण सड़क किनारे रेहड़ियों पर निर्भर हैं। अस्पताल के आसपास साफ और किफायती खाने के सीमित विकल्प होने के चलते लोग खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थ खरीदने को मजबूर हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। कई रेहड़ियों पर स्टील की प्लेटों और बर्तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें ठीक से साफ नहीं किया जाता। एक ही गंदे पानी में बार-बार बर्तन धोए जा रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ रही है।
धूल और प्रदूषण के बीच बिक रहा यह खाना सीधे तौर पर संक्रमण को बढ़ावा देता है, खासकर पहले से बीमार लोगों के लिए स्थिति और खराब हो जाती है। अस्पताल के ही बाहर फूड सेफ्टी नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। संबंधित विभागों की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमित जांच और सख्ती की कमी के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है।