यह योजना 2024-25 से लेकर 2034-35 तक के लिए तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, भारतीय वन्यजीव संस्थान की मदद से बनाई गई इस योजना को दिसंबर में मंजूरी दी गई थी।
दिल्ली के असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य में जंगल की आग से निपटने के लिए फायर लाइन बनाने, विशेष फायर रिस्पॉन्स यूनिट की तैनाती और जीपीएस से लैस टीमों की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है।
विज्ञापन
यह योजना 2024-25 से लेकर 2034-35 तक के लिए तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, भारतीय वन्यजीव संस्थान की मदद से बनाई गई इस योजना को दिसंबर में मंजूरी दी गई थी। प्रस्ताव के अनुसार, आग को फैलने से रोकने के लिए जंगल में विशेष फायर लाइन और गश्त के रास्ते बनाए जाएंगे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त फायर ट्रेल्स भी तैयार किए जाएंगे, ताकि आग लगने पर टीम जल्दी मौके तक पहुंच सके।
योजना में तीन विशेष रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट बनाने की बात कही गई है। इन टीमों को वॉकी-टॉकी, मोबाइल संचार उपकरण और जीपीएस टूल दिए जाएंगे। साथ ही आग बुझाने के लिए फायर बीटर, फावड़े, हेलमेट, दस्ताने और आग-रोधी कपड़े भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
विज्ञापन
एक विशेष फोन नंबर शुरू करने का भी प्रस्ताव
अधिकारियों ने बताया कि आग की घटनाओं की जानकारी तुरंत मिलने के लिए एक विशेष फोन नंबर शुरू करने का भी प्रस्ताव है। आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक करने और नियमित मॉक ड्रिल कराने की योजना भी बनाई गई है। योजना में कहा गया है कि अभयारण्य के आसपास बढ़ती आबादी, चराई, जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने और लापरवाही से लगने वाली आग के कारण जंगल और वन्यजीवों को खतरा बढ़ रहा है। इन उपायों से आग पर जल्दी काबू पाने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।