अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता पर एक रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ बार-बार याचिका दायर करने के लिए 1.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अधिवक्ता ने कंपनी और इसके निदेशकों ललित और सपना गोयल के खिलाफ कथित रूप से कंपनी के फंड को शेल कंपनियों में डायवर्ट करने के लिए सीबीआई जांच की मांग की थी।
न्यायमूर्ति मन्मीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने अधिवक्ता के लोकस स्टैंडी (कानूनी अधिकार) पर सवाल उठाया और पाया कि उन्होंने जानबूझकर यह तथ्य छिपाया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी कई याचिकाएं दायर की थीं। कोर्ट ने बब्बर द्वारा दायर पांच याचिकाओं पर प्रत्येक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर सभी रिट याचिकाएं लोकस स्टैंडी की कमी और गैर-रखरखाव के आधार पर खारिज की जाती हैं। इसके अलावा, अन्य याचिकाओं की लंबित स्थिति को जानबूझकर छिपाने, गलत बयान देने और इस कोर्ट के पिछले आदेशों की सामग्री को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए याचिकाकर्ता पर प्रत्येक याचिका के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना राशि दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में दो सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी। उसके बाद एक सप्ताह के भीतर अनुपालन का हलफनामा दायर करना होगा।