दिल्ली सरकार और अधिकारियों के बीच चल रही तनातनी अब दिल्ली विधानसभा की कमेटियों तक जा पहुंची है। उत्तरी दिल्ली इलाके में बगैर प्रशासनिक मंजूरी के काम शुरू करने के मामले में विधान सभा की एस्टीमेट्स कमेटी ने जल बोर्ड से जवाब मांगा है।
वहीं, दिल्ली इंजीनियर्स एसोसिएशन ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की है कि जल बोर्ड के सीईओ के साथ विधानसभा की गर्वमेंट अंडरटेकिंग कमेटी के अध्यक्ष ने बदसलूकी की है।
सूत्र बताते हैं कि जल बोर्ड में विकास कार्य करने के लिए दो तरह की मंजूरियां लेनी होती हैं। पहला, प्रोजेक्ट के वर्क ऑर्डर का और दूसरा काम करने की प्रशासनिक मंजूरी का। उत्तरी दिल्ली में जल बोर्ड ने 776 करोड़ रुपये के एसटीपी प्लांट बनाने का काम एक निजी कंपनी को दिया गया। लेकिन प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी नहीं ली गई।
सूत्रों की माने तो मामला जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के पास भी आया था। लेकिन जल बोर्ड की मीटिंग से कुछ समय पहले फाइल आने पर उन्होंने इस मामले मंजूरी देने से मना कर दिया था।
इस मामले में एस्टीमेट कमेटी को शक है कि मंजूरी नहीं लेने के पीछे निजी कंपनी को फायदा पहुंचाना मकसद हो सकता है। कमेटी ने कार्रवाई करते हुए प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज जल बोर्ड से मांगे थे। इसमें बोर्ड ने पहले बुधवार का समय मांगा था। लेकिन अब सोमवार तक का समय लिया है।