जमीन और यूटिलिटी की भी होगी पड़ताल
कॉरिडोर के लिए उपलब्ध जमीन का आकलन अध्ययन का अहम हिस्सा होगा। कंसल्टेंट को यह पता लगाना होगा कि कहां अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी और संभावित भूमि अधिग्रहण पर कितना खर्च आएगा। सड़क निर्माण की राह में आने वाली मौजूदा यूटिलिटी की पहचान कर उनके स्थानांतरण और उससे जुड़ी लागत का भी आकलन किया जाएगा।
मौजूदा मार्गों का दबाव घटाने की उम्मीद
नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में मौजूदा सड़क नेटवर्क पर यातायात दबाव एक बड़ी चुनौती है। नजफगढ़-फिरनी रोड पर अतिक्रमण से प्रभावी सड़क चौड़ाई कम होने, बसों और बस डिपो के कारण जाम तथा कई जगह पार्किंग से यातायात बाधित होने की समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में ड्रेन के दोनों किनारों पर नया सड़क नेटवर्क विकसित होने से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं। इससे विभिन्न इलाकों के बीच संपर्क बेहतर होने और प्रमुख व्यस्त सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
विकल्पों से तलाशे जाएंगे व्यावहारिक समाधान
कंसल्टेंट को पहले ट्रैफिक और स्थल सर्वे करना होगा। इसके बाद दो से तीन वैकल्पिक कॉन्सेप्चुअल प्लान तैयार किए जाएंगे। इनमें प्रत्येक विकल्प की अनुमानित लागत और निर्माण अवधि बताने के साथ सबसे व्यावहारिक योजना की सिफारिश करनी होगी। फिलहाल यह तय नहीं है कि पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड होगा या जमीन पर। अलग-अलग हिस्सों की परिस्थितियों के मुताबिक दोनों विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।