एक उम्र पर पहुुंचने के बाद लोग पढ़ाई करना छोड़ देते हैं, लेकिन सेक्टर- 61 में रहने वाले सीएल सुब्रह्मण्यम ने इसको झुठला दिया है। 93 साल की उम्र में मास्टर डिग्री करके इन्होंने साबित कर दिया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। ये सिलसिला यही नहीं थमा है, अब सीएल सुब्रह्मण्यम शार्ट टर्म कोर्स करने जा रहे हैं। हालांकि पहले इन्होंने एम फिल करने की सोची थी, लेकिन सीटें कम होने के चलते फैसला बदल लिया है। इनके इस जज्बे को देखते हुए इग्नू इन पर शार्ट फिल्म भी बनाने जा रहा है।
जिम्मेदारियों के चलते छूट गई थी पढ़ाई
मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले सीएल सुब्रह्मण्यम ने बताया कि मां की तबियत खराब रहने की वजह से 12 वीं के बाद पढ़ाई को जारी नहीं रख पाए। घर का खर्च चलाने के लिए गांव में ही छोटी सी नौकरी करनी पड़ी। वक्त के साथ जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ता गया, इसलिए वर्ष 1945 में परिवार के साथ दिल्ली आ गए। यहां आकर भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में बतौर क्लर्क की नौकरी की। प्रमोशन के लिए कई परीक्षाएं दी। 38 साल की सेवा के बाद 1986 में बतौर निदेशक रिटायर हुए।
वर्ष 2014 शुरू की थी पढ़ाई
सीएल सुब्रह्मण्यम ने बताया कि रिटायर होने से पहले मुझे बैंकॉक में आयोजित सेमिनार में जाने का मौका मिला। इसमें संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने मुझे नौकरी का ऑफर दिया। लगभग सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन जब उनको पता चला कि मैंने स्नातक नहीं की है तो नौकरी नहीं मिल पाई। ये चीज मुझे आज भी खलती थी। उन्होंने बताया कि उनके चार बच्चे हैं एक आर्मी में लेफ्टिनेंट जनरल, दो डॉक्टर और कृषि मंत्रालय में है। बच्चों को पढ़ाने के बाद उनके मन में था कि वह भी अपनी पढ़ाई पूरी करें और ग्रेजुएट बने।
वर्ष 2014 में मेरी पत्नी की तबियत खराब हो गई थी। उनके इलाज के लिए घर में ही फिजियोथैरेपिस्ट आता था। उन्होंने मेरे सामने इग्नू जिक्र किया। तब मैंने भी स्नातक के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में आवेदन किया। मेरी उम्र को देखकर अधिकारी भी हैरत में रह गए थे। स्नातक पूरी करने के बाद मैंने मास्टर इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में आवेदन किया। जब स्नातक की डिग्री मिली तो मैंने पत्नी के हाथों में डिग्री दी, उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। इस बाद का दुख है कि परास्नातक की डिग्री पत्नी को नहीं दे सका।
आगे की पढ़ाई के लिए मैंने विश्वविद्यालय में एमफिल में दाखिले के लिए पता किया, लेकिन इसकी सिर्फ 5 सीटें हैं। मुझसे ज्यादा जरूरत इस सीट की अन्य छात्र को है। इसलिए मैंने शार्ट टर्म कोर्स करने का मन बनाया है। पढ़ाई के साथ सीएल सुब्रह्मण्यम को स्पोर्ट्स का भी बहुत शौक है।
सुबह 4 बजे उठकर की पढ़ाई
पत्नी की तबियत खराब रहती थी। उसको कोई परेशानी ना हो, इसलिए सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करता था। यही नहीं, अधिक उम्र होने की वजह से लिखने के दौरान हाथ कांपते थे। इसलिए मैंने कंप्यूटर पर नोट्स बनाने शुरू किए और बेटी ने हाथ से पेपर पर लिखे। बीए की परीक्षाएं मैंने खुद से लिखी थी, उसमें मेरे 58 प्रतिशत अंक आए, लेकिन मुझे और अच्छे नंबरों की उम्मीद थी। इसलिए परास्नातक में बेटी विजयलक्ष्मी नटराजन राइटर बनी।