एमसीडी 10 साल में खर्च करेगी 924 करोड़ रुपये, इलेक्ट्रिक और सीएनजी मशीनों से होगी सड़कों की सफाई
विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम (एमसीडी) सड़कों की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने जा रहा है। इसके तहत राजधानी की सड़कों पर 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (एमआरएसएम) तैनात की जाएंगी। इन मशीनों की तैनाती, संचालन और अगले 10 साल तक रखरखाव पर करीब 923.57 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रस्ताव है। योजना का उद्देश्य सड़कों पर जमा धूल को नियमित रूप से हटाकर उसके कारण होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
एमसीडी ने मशीनों की तैनाती के लिए परियोजना को तीन पैकेजों में बांटा है। पैकेज-1 में 29, पैकेज-2 में 28 और पैकेज-3 में 13 मशीनें शामिल हैं। तीनों पैकेजों के लिए चयनित एजेंसियों की दरों और उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। निविदा प्रक्रिया के तहत तकनीकी बोलियों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। अब एजेंसियों के चयन और दरों की स्वीकृति का प्रस्ताव स्थायी समिति के माध्यम से एमसीडी के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही, संबंधित एजेंसियों के साथ अनुबंध करने के लिए निगम आयुक्त को अधिकृत करने की मंजूरी भी मांगी गई है।
स्वच्छ ईंधन वाली मशीनों पर जोर
परियोजना में डीजल चालित मशीनों के बजाय स्वच्छ ईंधन से चलने वाली मशीनों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। छोटी क्षमता वाली मशीनें इलेक्ट्रिक होंगी, जबकि बड़ी क्षमता वाली मशीनों के लिए इलेक्ट्रिक या सीएनजी का विकल्प रखा गया है। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही से जमा धूल हवा में उड़ती है और प्रदूषण बढ़ाने वाले सूक्ष्म कणों में योगदान करती है। मशीनों से नियमित सफाई होने पर धूल के जमाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, योजना का वास्तविक असर मशीनों की नियमित तैनाती, सफाई की गुणवत्ता और एकत्रित धूल के उचित निपटान पर निर्भर करेगा। दस साल की संचालन एवं रखरखाव व्यवस्था के तहत मशीनों की कार्यक्षमता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।