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फर्जी पासपोर्ट मामला: अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन समेत 4 आरोपियों को 7 साल की जेल

Wed, 26 Apr 2017 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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छोटा राजन
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अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी छोटा राजन समेत चार आरोपियों को फर्जी पासपोर्ट मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने सात-सात साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। यह पहला मामला है, जिसमें छोटा राजन को सजा सुनाई गई है।  
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सीबीआई का आरोप था कि छोटा राजन ने बंगलूरू पासपोर्ट कार्यालय के दोषी अधिकारियों से मिलीभगत कर 1998-99 में मोहन कुमार के नाम से फर्जी पासपोर्ट हासिल किया था।      

पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज वीरेंद्र कुमार गोयल ने राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ छोटा राजन व तीन अन्य दोषियों को सात साल कैद व 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। राजन के अलावा इस मामले में अन्य दोषी बंगलूरू पासपोर्ट कार्यालय के पूर्व अधिकारी हैं।      
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सीबीआई अदालत ने राजन समेत चारों आरोपियों को धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, जालसाजी, कीमती सरकारी प्रतिभूति का फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश व पासपोर्ट एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुये सजा सुनाई है। यह सभी सजा एक साथ चलेंगी। 
      
अदालत ने छोटा राजन समेत चारों आरोपियों को सोमवार को दोषी करार दिया था। अदालत ने सीबीआई व बचाव पक्ष की अंतिम जिरह सुनने के बाद 28 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था।       

बता दें कि छोटा राजन पर दिल्ली महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश व गुजरात में हत्या, रंगदारी, ड्रग तस्करी के 70 से ज्यादा मामले विचारधीन है। 
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अक्तूबर 2015 को बाली से पकड़ा गया था छोटा राजन

छोटा राजन
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी रहे छोटा राजन (55) को देश से भागने के 27 साल बाद बाली में अक्तूबर 2015 में पकड़ा गया था। छोटा राजन को नवंबर 2015 में बाली से गिरफ्तार कर भारत लाया गया था।     
 
अदालत के समक्ष सजा पर बहस करते हुये सीबीआई ने कहा कि छोटा राजन व अन्य दोषियों को अधिकतम सजा दी जाये ताकि अन्य लोगों को उससे सबक मिले। दूसरी ओर छोटा राजन के वकील अंशुमन सिन्हा ने कहा कि छोटा राजन को पासपोर्ट सरकारी एजेंसी ने मुहैया करवाया था, क्योंकि वह मुंबई धमाकों के बाद से आतंकियों के खिलाफ सरकार की मदद कर रहा था और उसकी जान को खतरा था। 

लिहाजा सजा देने में नरमी बरती जाये। मामले में अन्य दोषियों ने ज्यादा उम्र व खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुये सजा में नरमी बरतने का आग्रह अदालत से किया था।       

मामले में दोषी ललिता लक्ष्मणन ने विशेष सीबीआई अदालत के क्षेत्राधिकार को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने नौ जनवरी 2017 को याचिका खारिज करते हुये कहा था कि विशेष सीबीआई अदालत मामले की सुनवाई कर सकती है।   
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