राजधानी में पिछले वर्ष 2025 के दौरान लिए गए पेयजल के 100 में से करीब 30 प्रतिशत नमूने गुणवत्ता के मानक पर खरे नहीं उतरे अर्थात यहां का पानी पीने योग्य नहीं है। सबसे ज्यादा खराब व दूषित पानी की सप्लाई नजफगढ़ क्षेत्र में हो रही है। क्योंकि यहां के 66 फीसदी नमूने जांच में फेल पाए गए। यह स्थिति सरकारी दावों की पोल खोलने के साथ ही लाखों दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की ओर इशारा करती है।
नलों में बह रहा बदबूदार पानी
गंदे पानी पीने के कारण कॉलोनी में कई लोगों स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां हो रही है। करीब 5-6 महीने से घर में गंदा पानी आ रहा है। विधायक और जल बोर्ड ऑफिस में शिकायत भी की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
- एल-1 ब्लॉक निवासी पम्मी
सुबह पानी इतना गंदा आता है कि बाल्टी भरते ही पूरे घर में बदबू फैल जाती है। मजबूरी में लोग यह पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर खतरा मंडरा
रहा है।
- जे-4 ब्लॉक निवासी राहुल
पानी समस्या की शिकायत कालकाजी विधायक शिखा राय से भी की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कॉलोनियों में बीच-बीच में गंदा पानी आता है। पानी में इतनी बदबू आती है कि हाथ भी साफ नहीं कर सकते।
-जितेंद्र, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए, एलआईजी फ्लैट्स
द्वारका सोसाइटियों में भूजल प्रदूषण, 124 जगहों पर बैक्टीरिया मिला
राजधानी में बारिश का पानी जो घरों की छतों से इकट्ठा होकर भूजल रिचार्ज करने के काम आता है वही खतरे का सबब बनता जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में द्वारका के कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज (सीजीएचएस) के 144 रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स से सैंपल लिए गए।
इनमें से 124 पिट्स में फीकल कोलीफॉर्म (मल-जनित बैक्टीरिया) की मौजूदगी पाई गई। यानी ज्यादातर जगहों पर सीवर का गंदा पानी इन पिट्स में मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, डीजेबी ने इन सोसाइटियों को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहले से फीकल कोलीफॉर्म वाली 115, नॉन-फंक्शनल आरडब्ल्यूएचएस वाली 4 और सूखी पिट वाली 25 है।
जांच में पाया गया कि 124 सोसाइटियों में बैक्टीरिया है, 8 में सिस्टम सूखा है। 3 ने सैंपल देने से मना कर दिया, 7 में काम चल रहा है और 2 में सिस्टम खराब है। डीजेबी के चीफ इंजीनियर संदीप कपूर की ओर से जारी हलफनामे के अनुसार, वे लगातार सोसाइटियों से बात कर रहे हैं और नियमों का पालन कराने के लिए मौखिक, लिखित चेतावनी दे रहे हैं। यह मामला महेश चंद्र सक्सेना बनाम दिल्ली सरकार का है, जो 2021 से चल रहा है।
एनजीटी ने 31 जुलाई 2025 के आदेश में डीजेबी से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। डीजेबी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से पर्यावरणीय जुर्माना लगाने की मांग की है। डीपीसीसी ने मार्च 2025 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से गाइडलाइंस मांगी थीं और अक्तूबर 2025 में फिर रिपोर्ट मांगी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सिस्टम ठीक नहीं हुए तो भूजल और ज्यादा दूषित होगा, जो पीने के पानी की समस्या बढ़ाएगा। दिल्लीवासी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द कार्रवाई से समस्या हल होगी।
कहानी 2023 से शुरू हुई, अब खतरा और बढ़ गया
पूरा मामला फरवरी 2023 से एनजीटी में चल रहा है, जब एक द्वारका निवासी ने शिकायत की कि सोसाइटियों के रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम गलत तरीके से बने हैं और इससे भूजल प्रदूषित हो रहा है। मई 2023 में एनजीटी की एक्सपर्ट कमिटी ने डीजेबी और डीपीसीसी के साथ मिलकर 235 सोसाइटियों की जांच की, जिसमें 180 जगहों पर अमोनियाकल नाइट्रोजन और टीडीएस का स्तर बहुत ज्यादा पाया गया। उसके बाद मार्च 2025 तक की रिपोर्ट में 115 सोसाइटियों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। अब सितंबर 2025 की ताजा जांच में हालात और बिगड़े नजर आए 144 सैंपलों में 124 दूषित, 8 सूखे, 7 में रिपेयर चल रहा, 2 पूरी तरह बंद पड़े और तीन सोसाइटियों ने तो सैंपल लेने तक से मना कर दिया।