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बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मजदूर दिवस पर नगर निगम की 66 नर्सों को नौकरी से निकाला

Tue, 02 May 2017 09:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार


- उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने भाजपा के एजेंडे के उलट शुरू किया काम
- भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने का किया था वादा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीनों नगर निगम के चुनाव में भाजपा की भारी जीत के बाद अधिकारियों ने पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के बजाए उसके उलट कार्य करना आरंभ कर दिया। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने सोमवार को मजदूर दिवस पर अस्थायी तौर पर कार्यरत 66 नर्सों को नौकरी से निकाल दिया।
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इन नर्सों ने वर्ष 1998 से 2013 के बीच कार्य करना शुरू किया था। वहीं, नगर निगम ने 46 अन्य अस्थायी तौर पर कार्यरत नर्सों को अगले सोमवार से हटाने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि भाजपा ने नगर निगम चुनाव में नर्सों समेत अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था।

नौकरी से हटाए जाने के संबंध में सभी 66 नर्सों ने शुक्रवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी से मुलाकात की थी। तिवारी ने 24 घंटे में उनको नौकरी से हटाने का आदेश रद्द कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन आदेश रद्द नहीं हुआ और सोमवार को सभी 66 नर्सों को नौकरी से निकाल दिया गया।
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दिनभर मनोज तिवारी का इंतजार करती रहीं नर्सें

इसके बाद वे प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचीं, लेकिन वहां उनकी समस्या सुनने के लिए कोई नेता मौजूद नहीं था। नर्सें सोमवार दिन भर मनोज तिवारी के आने के इंतजार में प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठी रहीं, लेकिन तिवारी से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई।

दूसरी ओर उत्तरी दिल्ली नगर निगम 8 मई को 46 अन्य नर्सों को हटाएगा। इन्हें पिछले वर्ष भी हटाया गया था, लेकिन उनके लगातार चार माह तक धरना-प्रदर्शन करने के चलते निगम ने उन्हें नौकरी दे दी थी।

​खास बात यह है कि नगर निगम के नए सदन के सदस्यों के कामकाज नहीं संभालने की स्थिति में पिछले सदन के अंतिम वर्ष में महापौर पद पर चुने गए संजीव नैय्यर अभी भी महापौर का कार्यभार संभाले हुए हैं। मगर उन्होंने अपनी पार्टी के घोषणा के उलट कार्य करने से अधिकारियों को रोकने की दिशा में कोई पहल नहीं की।
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