आम आदमी पार्टी सरकार ने 605 दिन पूरे किए लेकिन दर्जनभर प्रोजेक्ट और फैसले फाइल, तकनीकी पेच और केंद्र सरकार के बीच फंसे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आप सरकार ने डिजिटल दिल्ली को आगे बढ़ाने के लिए तमाम घोषणाएं की जिसमें ऑनलाइन आरटीआई, फ्री वाई-फाई, सीसीटीवी कैमरे, मरीजों के ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्मार्ट कार्ड योजना अभी भी जमीन पर नहीं उतर पाई है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अनधिकृत कॉलोनी नियमन, पुनर्वास कॉलोनी को मालिकाना हक, स्लम फ्री दिल्ली, डीटीसी बेड़े में नई बसें, मेट्रो फेज-चार के डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को मंजूरी, राशन दुकान पर सेल्स डिवाइस, सिग्नेचर ब्रिज निर्माण, बसों में सीसीटीवी कैमरे, एक कार्ड पर बस मेट्रो में सफर की योजनाओं पर काम शुरू किया था लेकिन इन्हें अंजाम तक नई सरकार भी नहीं पहुंचा पाई है।
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अनधिकृत कॉलोनी नियमन में चुनावी साल को देखते हुए तेजी से घोषणाएं की थी। यहां तक की 512 कॉलोनियां नियमित घोषित करके आदेश भी निकाल दिए लेकिन कोई कॉलोनी नियमित नहीं हुई।
नई सरकार में अरविंद केजरीवाल ने उपमुख्यमंत्री मनिष सिसोदिया की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह बनाकर नियमन के दिशा निर्देश में संशोधन करके केंद्र सरकार को फाइल भेजी जिस पर सवाल जवाब जारी है। मामला निचली श्रेणी की कॉलोनी में विकास शुल्क छूट व वसूली के बीच फंसा है।
दिल्ली की 45 पुनर्वास कॉलोनी के आवंटियों को मालिकाना हक देने का फैसला शीला दीक्षित की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने पुरानी सरकार में ही कर दिया था। लेकिन शुल्क अधिक था।
केजरीवाल सरकार की कैबिनेट ने शुल्क मूल आवंटी के लिए 1000 रुपये और दूसरे नंबर के खरीदार के लिए 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया। लेकिन मामला शहरी विकास विभाग की आपत्ति पर अटक गया है।
केजरीवाल
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राष्ट्रपति शासन काल के दौरान ही मेट्रो फेज-चार के डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करा दी गई थी। नई सरकार के आने के बाद कसरत शुरू हुई। कई बार बैठक के बावजूद अंतिम मंजूरी दिल्ली कैबिनेट से अभी तक नहीं मिली है। सैद्धांतिक मंजूरी को केंद्र सरकार ने नहीं माना है। ऐसे में मेट्रो फेज-चार का काम शुरू होने में देरी होने की पूरी आशंका है।
डीटीसी बेड़े में नहीं बढ़ी बसें
राजधानी में ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन की दिक्कत के बीच डीटीसी बेड़े में बसें बढ़ाने की पुरानी सरकार में शुरू हुई कसरत अब भी जारी है। लेकिन नई सरकार कभी छोटी बस, कभी बड़ी बस तो कभी एसी और नॉन एसी के बीच असमंजस में फंसी है। हालात यह है कि बेड़े में बसें लगातार घट रही हैं।
शीला दीक्षित सरकार में शुरू हुए सिग्नेचर ब्रिज के प्रोजेक्ट को भी नई सरकार समय पर पूरा नहीं कर पाई। कई बार काम पूरा करने का लक्ष्य बदला। अब 2017 के पहली छमाही में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई सरकार में डिजिटल दिल्ली बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई घोषणाएं की गईं लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच सकीं। पुरानी सरकार में राशन दुकान पर सेल्स डिवाइस और बसों में सीसीटवी कैमरे लगाने की योजना हो या फिर नई सरकार की ऑनलाइन आरटीआई, फ्री वाईफाई, मरीजों के ऑनलाइन रिकार्ड और स्मार्ट कार्ड योजना जमीन पर नहीं उतर सकी है।