अगर आप यह मानते हैं कि महिलाएं अपने घर में ज्यादा महफूज हैं तो यह आपकी भूल है। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक ऐसी रिपोर्ट पेश की है जिसके आंकडे पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे।
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पुलिस की ओर दिए गए आंकड़ों में यह बताया गया है कि महिलाओं के साथ बढ़ रहे अपराध के 60 फीसदी मामले घरों में ही होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 में दर्ज कराए गए 2276 मामलों में से 1767 मामलों में अपराधी, पीड़ित महिला के रिश्तेदार या परिचित थे, जबकि 509 मामलों में आरोपी अपरिचित थे।
पुलिस ने कोर्ट में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया है कि राजधानी के किन इलाकों में महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ा है और कहां अपराध सबसे कम है
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ये आंकड़े खोल देंगे आपकी आंखें!
पुलिस ने बताया कि इस साल अब तक सामने आए मामलों में 1450 आरोपी परिचित थे जबकि 317 मामलों में रिश्तेदारों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि राजधानी में महिलाओ के प्रति बढ़ते अपराध के मामलों ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है। पिछले साल के मुकाबले महिला अपराधों में 'मात्र' 9 फीसदी की बढोतरी हुई है।
पुलिस ने यह रिकॉर्ड हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद पेश किया है जिसमें कोर्ट ने राजधानी में बढ़ रहे महिला अपराध के मामलों का विस्तृत डाटा मांगा था। साथ ही यह भी कहा था कि दिल्ली में सबसे अधिक और सबसे कम क्राइम वाले इलाकों का भी ब्यौरा दिया जाए।
बता दें कि अप्रैल में सामाजिक कार्यकर्ता नंदिता धर की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने दिल्ली में क्राइम मैपिंग शुरू की थी। यह याचिका राजधानी में छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों के खिलाफ थी।
तो ये है रेप के मामलों 'सच'!
पुलिस की ओर से पेश किए गए हलफनामा में यह कहा गया है कि 15 सितंबर तक रिपोर्ट किए गए दुष्कर्म के 590 मामलों में से 263 मामले या तो लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों ने दर्ज कराए थे, या फिर घर से भागने वाले लोगों ने। इन मामलों में प्रॉपर्टी विवाद भी बड़ी वजह थी।
इसी तरह, महरौली थाने में दर्ज कराए गए छेड़छाड़ के 76 मामलों में से 72 मामले ऐसे थे जिनमें महज कहासुनी या आपसी विवाद के बाद दूसरे पक्ष को फंसाने के उद्देश्य से ऐसे आरोप लगाए गए।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि ऐसे मामले सही हैं या नहीं, उन्हें साबित करना तब काफी मुश्किल होता है जब ये मामले घर में होते हैं। हालांकि नंदिता के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर एक चाल चल रही है।
पुलिस रिश्तेदारों और परिचितों का डाटा एक साथ मिलाकर कोर्ट को गुमराह कर रही है, ताकि अपनी छवि को बेहतर दिखा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस को सभी आरोपियों को अलग-अलग कैटेगरी में रख डाटा पेश करना चाहिए और उसका विवरण देना चाहिए।
हाई क्राइम इलाकों में क्या करती है पुलिस?
गौर करने वाली बात ये है कि हलफनामे में बताए गए 'हाई क्राइम' और 'लो क्राइम' इलाकों में पुलिस की कार्यशैली भी अलग-अलग है। इन इलाकों में पुलिस की सक्रियता बिल्कुल बदली होती है।
जैसे वर्तमान में महरौली इलाके को 'हाई क्राइम' की श्रेणी में रखा गया है। इस इलाके में बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर लगाए गए हैं जिनमें यह संदेश दिया गया है कि महिलाओं से किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना अपराध है। जन कल्याण संगठन और एनजीओ लिंग भेद को मिटाने के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।
स्कूल-कॉलेजों के बाहर, बस स्टॉप और बाजारों में भी पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। जबकि इसी के नजदीकी इलाके सफदरगंज को 'लो क्राइम' की श्रेणी में रखा गया है। यहां मोटरसाइकिल से पुलिस पेट्रोलिंग होती है। साथ ही कुछ जगहों पर विशेष पिकेट भी तैनात की गई हैं।
बता दें कि यह मामला बुधवार को अदालत में पेश होना था लेकिन सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता की नामौजूदगी की वजह से इसकी सुनवाई टाल दी गई।
कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने अप्रैल में क्राइम मैपिंग शुरू की।2276 मामलों में से 1767 मामलों में आरापी या तो रिश्तेदार थे या फिर परिचित।1450 मामले ऐसे थे जिनमें महिला आरोपी को पहचानती थी।317 मामलों में महिला पर हमला करने वाला कोई रिश्तेदार ही था।इस साल 15 सितंबर तक रेप के कुल 590 मामले सामने आए हैं।इनमें से 263 मामले लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों ने दर्ज कराए थे या घर से भागने वाले और प्रॉपर्टी विवाद की वजह से।छेड़छाड़ के ज्यादातर मामले शिफ्ट स्कूलों के आसपास सामने आए।पुलिस ने 15 ऐसे स्थानों को चुना जहां महिलाओं के साथ ज्यादा अपराध होते हैं।साभार: इंडियन एक्सप्रेस