गांव छारौड़ा के ग्रामीण बंदरों के आंतक से खौफजदा है। रविवार को घर में सो रहीं 6 महीनें की मासूम बच्ची के कान व सिर को पंजों से नोंच डाला। परिजनों ने बड़ी मुश्किल से बच्ची को छुड़ाया।
घायल को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज नूंह ले जाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों को पकड़वाने की मांग की है। पीड़ित शौकत ने बताया की रविवार को घर में सो रहीं उसकी 6 माह की भतीजी अलसीफा को बंदर खींचकर ले गए। बच्ची के रोने का शौर सुनकर जब परिजन पहुंचे तो बंदर उसके एक कान व सिर को पंजों से नोच कर भाग गए।
पीड़ित ने बताया की उपचार के लिए बच्ची को नल्हड़ ले जाया गया है। सरपंच इरशाद, पंच शाहिद, पूर्व पंच जमालुदीन, शोक्त, इस्सन, पहलू , तसलीम, पंच विनोद व हाशिम आदि ग्रामीणों ने बताया कि उनके मौहल्ले में बंदरों के एक गिरोह ने काफी समय से आंतक मचाया हुआ है।
इनके आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। डर की वजह से लोगों ने घरो की छतो पर चढऩा बंद कर दिया है। पिछले तीन दिनों में जहां यह तीन बच्चों पर हमला कर घायल कर चुके है।
वहीं दर्जन भर ग्रामीणों को भी घायल कर चुके है। बंदरों का गिरोह पूरे दिन झुंड बनाकर इस घर से उस घर में धमाचौकड़ी मचाते घूमते रहते हैं। कोई इनसे बचाव के लिए उनकी ओर थोड़ा भी आक्त्रस्मण करता है तो सभी मिलकर उसे काटने को दौडते हैं।
ग्रामीणों का कहना है की बंदरों के आ जाने पर घर में अकेली गृहणियों की कमरों में कैद होने जैसी स्थिति बन रही है। किसी कारणवश रसोई घर खुला रह गया तो बंदर अंदर घुसकर सारा सामान नष्ट कर देते हैं।
छतों पर सूखने वाले कपड़ों को फाडऩे , पानी की टंकियों के पाईपों को क्षतिग्रस्त करने से भी नहीं हिचकते है। बंदरों के आंतक से छोटे बच्चों को इनसे बचाना मुश्किल कार्य हो गया है। ग्रामीणों ने इनके आंतक से निजात दिलाने की मांग की है।