सरकार ने नए कैमरे लगाने और इनके रखरखाव के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया है। दूसरी तरफ पीडब्ल्यूडी के पिछले साल कराए सेफ्टी ऑडिट में पता चला है कि 7,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे ऑफलाइन पाए गए हैं।
दिल्ली की सुरक्षा कवरेज बढ़ाने के लिए सरकार 50 हजार अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएगी। अब तक करीब 2.8 लाख कैमरे लगाए जा चुके हैं। ये कैमरे बाजारों, सड़कों, रिहायशी कॉलोनियों और व्यावसायिक क्षेत्रों में लगाए गए हैं और इनका सीधा कनेक्शन पीडब्ल्यूडी मुख्यालय के सेंट्रल कमांड सेंटर से है।
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सरकार ने नए कैमरे लगाने और इनके रखरखाव के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया है। दूसरी तरफ पीडब्ल्यूडी के पिछले साल कराए सेफ्टी ऑडिट में पता चला है कि 7,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे ऑफलाइन पाए गए हैं। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं, जिनमें बिजली कटौती, तकनीकी खराबी, नेटवर्क की समस्या, कैमरों के पुर्जों की चोरी, तोड़फोड़ और कुछ मामलों में कैमरों का हटाया जाना या स्थानांतरण शामिल है। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भेल को सौंपी गई है।
संयुक्त टेंडर जारी करने की योजना
पीडब्ल्यूडी का मानना है कि सीसीटीवी कैमरों की देखरेख की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से भविष्य में कैमरों के बेहतर रखरखाव के लिए संयुक्त टेंडर जारी करने की योजना है। फिलहाल रखरखाव का काम अलग-अलग कंपनियां देख रही हैं, जिनमें समन्वय की दिक्कत आ रही है। विभाग का दावा है कि नए टेंडर के जरिए एक ही एजेंसी को जिम्मेदारी देकर इन समस्याओं को दूर किया जा सकेगा।