मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद योगी ने 15 जून 2017 तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का दावा किया था, लेकिन प्रदेश की शो विंडो की सड़कों के जख्म आज तक नहीं भरे हैं। जिला पुलिस की रिपोर्ट के आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं। साल 2017 में सड़कों के गड्ढों ने 45 जिंदगियां लील लीं। सड़कों की मरम्मत के नाम पर प्राधिकरण ने करोड़ों रुपया खर्च कर डाला, लेकिन पुरानी गलतियों से सबक लेने की जरूरत नहीं समझी। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही सड़कों की सूरत को बिगाड़कर रख दिया है।
आखिर क्या कहती है रिपोर्ट
जिला पुलिस की रिपोर्ट साल 2017 के सड़क हादसों को ध्यान में रख तैयार की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक 1043 सड़क हादसे हुए, जिनमें 419 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सड़कों पर गड्ढों की वजह से 74 हादसे हुए जिनमें 45 लोगों की जान चली गई। इतना ही नहीं निर्माणाधीन सड़कों और मरम्मत कार्य की वजह से भी 121 सड़क हादसे हुए और 65 लोगों ने जान गंवाई।
सड़कों पर दिख रहे लापरवाही के सबूत
सड़कों की बदहाली भी ट्रैफिक के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं है। शहर में जगह-जगह लापरवाही के सबूत देखे जा सकते हैं। कहीं सीवर के ऊंचे ढक्कन तो कहीं खराब सड़कें जाम की वजह तो बन ही रही है, बल्कि राहगीरों के लिए जानलेवा भी साबित हो रही हैं। इसके बावजूद नोएडा प्राधिकरण की नींद नहीं टूट रही है। शहर में कई ऐसे मुख्य मार्ग हैं जहां लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-11/12/56 चौराहा, वसुंधरा दिल्ली को नोएडा के सेक्टर-6 से जोड़ने वाला मार्ग, लेबर चौक, सेक्टर-63, फेस-2 सहित कई जगह लापरवाही के नमूने देखे जा सकते हैं।
कार्रवाई क्यों नहीं
अट्टा बाजार व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सीबी झा कहते हैं कि सड़कों पर लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ प्राधिकरण आखिर कार्रवाई क्यों नहीं करता। अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनने वाली यह लापरवाही जानलेवा साबित हो जाती है। ऐसे मामलों को अपराध मानते हुए संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए।