नई दिल्ली।
राजधानी में उम्र पूरी कर चुके बीएस-4 श्रेणी के करीब साढ़े चार लाख वाहन मालिक इन दिनों न तो पूरी तरह राहत में हैं और न ही स्पष्ट प्रतिबंध में। सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई पर रोक मिलने के बाद उम्मीद थी कि सरकार शीघ्र दिशा-निर्देश जारी करेगी, लेकिन परिवहन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में वाहन मालिक पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं बनवा पा रहे हैं।
दरअसल, दिल्ली सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि बीएस-4 श्रेणी के ऐसे वाहन सड़क पर उतारने से पहले प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) लेना अनिवार्य होगा। लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि विभाग की वेबसाइट और पीयूसी सेंटर के सॉफ्टवेयर में ये वाहन उम्र पूरी श्रेणी में ब्लॉक दिख रहे हैं। जिससे प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहा। बीते वर्ष जुलाई में उम्र पूरी कर चुके वाहनों की जब्ती अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग प्रभावित हुए थे। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि केवल आयु के आधार पर नहीं, बल्कि फिटनेस और उत्सर्जन मानकों के आधार पर निर्णय होना चाहिए। दिसंबर में आए आदेश में बीएस-3 और उससे निचली श्रेणी को राहत नहीं मिली, लेकिन बीएस-4 श्रेणी के वाहनों पर सख्त कार्रवाई पर रोक रही। अप्रैल से अब तक ऐसे वाहनों की संख्या 4.5 लाख से अधिक हो चुकी है। वाहन मालिकों का कहना है कि जब तक स्पष्ट अधिसूचना और तकनीकी अपडेट जारी नहीं होता, वे कानूनी रूप से सड़क पर वाहन नहीं उतार सकते।