इसमें 11 प्रोजेक्टों की रिपोर्ट में ऑडिट एजेंसी ने बताया है कि जितनी राशि बिल्डरों ने निवेशकों से प्राप्त की है उतनी खर्च नहीं की है। यही नहीं प्राधिकरण का बकाया भी नहीं दिया।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह पैसे कहां गए। इस संबंध में इन सभी बिल्डरों को प्राधिकरण की तरफ से नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
यही नहीं ऑडिट एजेंसी की रिपोर्ट से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के चेयरमैन को भी अवगत कराया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक छह बिल्डर प्रोजेक्टों के आय और खर्चे में 2500 करोड़ का भारी अंतर पाया गया। वहीं पांच बिल्डर प्रोजेक्टों के आय और व्यय में करीब 1000 से 1500 करोड़ का अंतर पाया गया है। तीन प्रोजेक्टों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।