सूत्रों का कहना है कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर आते ही लोग घबरा जाते हैं और ट्रैक पर वाहन चलाते वक्त कोई ना कोई गलती कर देते हैं। हालांकि ड्राइविंग ट्रैक पर जाने से पहले लोगों को व्यक्तिगत रूप से पूरी जानकारी दी जा रही है और नियमों के बारे में बताया जा रहा है।
एडीटीसी में कैमरों और सेंसर के जरिये हो रही मॉनिटरिंग और वीडियोग्राफी की जांच में पता लगा है कि लोग ड्राइविंग की अधूरी ट्रेनिंग के लिए लाइसेंस बनवाने के लिए आते हैं, जिस कारण वे फेल हो रहे हैं। इसके साथ ही इस टेस्ट को पास करने के लिए कई लोगों में आत्म विश्वास की कमी भी देखी गई है।
वर्तमान में चल रहे हैं चार एडीटीसी
वर्तमान में मयूर विहार फेज-1, विश्वास नगर, सराय काले खां और शकूर बस्ती, चार आरटीओ ऑफिस में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर शुरू हो चुके हैं, जबकि अन्य आठ जगह लाडो सराय, राजा गार्डन, हरि नगर, बुराड़ी, लोनी रोड, रोहिणी, झडौदा कलां और द्वारका में जल्द ही ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर शुरू हो जाएंगे।
ऑटोमेटेड ट्रैक का नियम
ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट के दौरान कार लाइसेंस के लिए रिवर्स पैरलल पार्किंग, उप-ग्रेडिएंट, फॉरवर्ड-8, रिवर्स-एस, ट्रैफिक जंक्शन और एच-ट्रैक शामिल है, जबकि बाइक के लिए एस और फारवर्ड-8 ट्रैक पर बाइक चलानी पड़ती है।
टेस्ट में फेल होने के बाद भी कोई शिकायत नहीं
शुक्रवार को सराय काले खां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंचे प्रशांत कार और बाइक दोनों टेस्ट में फेल हो गए। उनका कहना है कि ट्रैक पर आकर वह थोड़े घबरा गए, जिस कारण उनसे गलती हुई। उन्हें इस सिस्टम से कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम तो बेहतर है, लेकिन यहां पास होने के लिए उन्हें फिर से एक सप्ताह बाद टेस्ट देना होगा।