दिल्ली में आम आदमी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। दिल्ली की सभी सात सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों से आप के उम्मीदवार हार गए।
लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की आप के एक उम्मीदवार को बीजेपी के उम्मीदवार नहीं हराया, बल्कि उसे उसके नाम और चुनाव निशान ने हरा दिया।
पश्चिमी दिल्ली के आप उम्मदीवार नाम जरनैल सिंह है, जबकि इसी लोकसभा से दो और जरनैल सिंह मैदान में थे। यहीं नहीं एक जरनैल सिंह का चुनाव निशान भी आप की झाड़ू से मिलता जुलता था, उन्हें 84722 वोट मिले। खुद आप के जरनैल सिंह ने प्रचार के दौरान यह माना था कि एक ही नाम के तीन उम्मीदवार होने से वोटरों में भ्रम बन गया है।
हो गया वादा खिलाफी का भ्रम!
जनरैल सिंह के हारने में एक और किस्म तथ्य छुपा है। दरअसल, आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनावों से पहले दिल्ली में यह ऐलान किया था कि दिल्ली के किसी भी विधायक को लोस टिकट नहीं दिए जाएंगे। लेकिन बाद में पार्टी ने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में अपने पहले घोषित किए गए उम्मीदवार को हटाकर राखी बिड़लान को टिकट दे दिया।
हालांकि जरनैल सिंह के मामले में लोगों को भ्रम इसलिए हो गया कि इस लोकसभा क्षेत्र के सबसे प्रमुख विधानसभा के विधायक का नाम भी जरनैल सिंह है। यहीं नहीं, वह क्षेत्र में काफी लोकप्रिय भी हैं।
ऐसे में जब उसी क्षेत्र में लोकसभा चुनाव प्रत्याशी का फिर से जरनैल सिंह लोगों को सुनाई पड़ा, तो उन्होंने ये समझा कि विधायक जरनैल सिंह को ही पार्टी ने लोस टिकट दे दिया। खुद विधायक जरनैल सिंह को इसके बारे में एक अपील जारी कर कहना पड़ा था कि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद लोगों को आप के उस वायदे का खिलाफत करने का भ्रम हो गया, जिसमें आप ने विधायकों को लोस टिकट न देने की बात कही थी।
यही है दिल्ली का रिवाज
दिल्ली में आम आदमी पार्टी का सफाया होने के पीछे एक और वजह है। दरअसल, दिल्ली जिधर मुड़ती है, उधर पूरी तरह से मुड़ जाती है। यानि दिल्ली में आमतौर पर एक ही पार्टी सातों सीट जीतती है।
अब तक हुए सोलहों लोकसभा चुनाव में ऐसा गिने-चुने बार हुआ है कि दिल्ली में दो या दो से अधिक पार्टियों को सीट मिली है। आमतौर पर हमेशा दिल्ली में किसी एक पार्टी को सातों सीट मिलती है, पिछले बार कांग्रेस ने सातों सीटें जीती थीं, इस बार बीजेपी ने सारी सीटें जीती हैं।
इसी होड़ में आम आदमी पार्टी को जिन सीटों पर जीत पक्की लग रही थी वहां भी हार का सामना करना पड़ा।
ये है सबसे बड़ी वजह
दिल्ली में आप का सफाया होने की सबसे बड़ी वजह दिल्ली में 49 दिनों की सरकार चलाकर केजरीवाल का इस्तीफा देना। दिल्ली में 28 सीट जीतने के बावजूद आप ने प्रमुख विरोधी कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बनाई।
हालांकि तब पार्टी ने दावा किया कि उसने दिल्ली की जनता से पूछने के बाद यह फैसला लिया है। उस वक्त केजरी टीम ने दिल्लीवासियों से एक लेटर पर राय मांगी थी।
यही काम केजरीवाल ने सरकार छोड़ने से पहले नहीं किया। इससे जनता में एक अविश्वास का महौल पैदा हो गया। शायद दिल्ली में आप की यह दुर्दशा हाने में इस फैसले का असर है।