पंजाब और गोवा विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी आम आदमी पार्टी (आप) की मुसीबत बढ़ गई है। दिल्ली सरकार में संसदीय सचिवों के पद पर नियुक्त 21 विधायकों की सदस्यता पर लटक रही अयोग्यता की तलवार का मामला ठंडा होने से पहले ही लाभ के पद मामले में 27 और विधायकों की सदस्यता पर खतरे की तलवार लटक गई है।
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चुनाव आयोग ने मोहल्ला क्लीनिक सभा (रोगी कल्याण समिति) में अध्यक्ष पद पर कार्यरत 27 विधायकों को कारण बताओ नोटिस भेजकर 11 नवंबर तक जवाब देने को कहा है। इन विधायकों में संसदीय सचिव नियुक्ति विवाद में पहले से ही उलझे 10 विधायक भी शामिल हैं। इस प्रकार ऐसे विधायकों की संख्या 38 हो गई है जिनकी सदस्यता पर खतरे की तलवार लटक रही है। खास बात यह है कि दोनों ही मामलों में राष्ट्रपति ने ही चुनाव आयोग को निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
दरअसल कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र विभोर आनंद ने अयोग के समक्ष सभा में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लाभ के पद पर नियुक्ति बताते हुए ऐसे 27 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की। आनंद ने अपनी शिकायत में कहा था कि सभा में विधायक बतौर सदस्य ही शामिल हो सकते हैं, बतौर अध्यक्ष नहीं। शिकायत के मुताबिक चूंकि सभा के पास डॉक्टर समेत अस्थाई कर्मचरियों की भर्ती, दो लाख तक के निर्माण कार्य को मंजूरी देने और अस्पताल परिसर में दुकान लीज या किराए पर देने का अधिकार है। ऐसे में सभा का अध्यक्ष पद स्वत: लाभ के पद के दायरे में आ जाता है। इसके बाद आयोग ने इस मामले को राष्ट्रपति के पास भेजा। राष्ट्रपति ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति मामले की तरह इस मामले को भी आयोग को भेज दिया। इसके बाद आयोग ने सभी 27 विधायकों को नोटिस भेजा। गौरतलब है कि अस्पतालों के प्रबंधन से जुड़ी रोगी कल्याण समिति में सांसद, विधायक, स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया जाता है।
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आयोग की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद आम आदमी पार्टी इसका जवाब देने के लिए कानूनी सलाह ले रही है। मुश्किलों में घिरे विधायक आयोग को अपने जवाब में समिति के अध्यक्ष पद को लाभ के दायरे से बाहर बताएंगे। इनका तर्क होगा कि दिल्ली विधायक अयोग्यता निवारण कानून 1997 में पहले ही इस पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर कर दिया गया है। विधायक इस समिति के सोसाइटी होने का दावा करते हुए यह भी तर्क देंगे कि सोसाइटी का अध्यक्ष पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता। इसके अलावा विधायक यह भी बताएंगे कि समिति वास्तव में अस्पताल सलाहकार समिति है, जिसे पूर्ववर्ती शीला सरकार ने रोगी कल्याण समिति बना दिया था।
अलका लांबा, बंदना कुमारी, अजेश यादव, शिवचरण गोयल, जरनैल सिंह, जगदीप सिंह, जितेंद्र सिंह तोमर, एसके बग्गा, राजेश गुप्ता, राजेश ऋषि, विशेष रवि, रामनिवास गोयल, वेद प्रकाश, नरेश यादव, नितिन त्यागी, पंकज पुष्कर, सोमनाथ भारती, कैलाश गहलोत, राजेंद्र पाल गौतम, हजारी लाल चौहान, मदन लाल, शरद चौहान, राखी बिड़लान, महेंद्र गोयल, मोहम्मद इशराक, सुरेंद्र कमांडो और अनिल बाजपेयी
दोनों मामलों में उलझे विधायक- जरनैल सिंह, अनिल बाजपेयी, कैलाश गहलोत, शिवचरण गोयल, अलका लांबा, नरेश यादव, राजेश गुप्ता, शरद चौहान, राजेश ऋषि और मदन लाल
21 विधायकों पर सुनवाई जारी
संसदीय सचिवों के पद पर कार्यरत 21 विधायकों के मामले में चुनाव आयोग की सुनवाई जारी है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ने इस मामले में दिल्ली सरकार की दलील को ठुकराते हुए आगे की कार्रवाई के लिए मामले को चुनाव आयोग के हवाले कर दिया था।