78 सब डिविजनल टीमें 24 घंटे मैदान में रहेंगी। इनका नेतृत्व दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के एईई और जेईई स्तर के अधिकारी करेंगे। टीमें रात में भी निरीक्षण करेंगी। पराली और बायोमास जलाने, निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, गैर-अनुमोदित ईंधन के इस्तेमाल और निर्माण मलबे की अवैध डंपिंग पर कार्रवाई होगी। टीमें यह भी देखेंगी कि निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां डस्ट पोर्टल के दायरे में हैं या नहीं। डीजी सेट के इस्तेमाल में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। कच्ची सड़कों और बड़े गड्ढों वाली सड़कों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
हर वार्ड के हिसाब से इस बार निगरानी
प्रदूषण पर स्थानीय स्तर पर नजर रखने के लिए 256 वार्डों में निगरानी टीमें तैनात होंगी। इनमें एमसीडी क्षेत्र के लिए 250, एनडीएमसी के लिए चार और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के लिए दो टीमें होंगी। ये टीमें कचरा और बायोमास जलाने, निर्माण धूल, अवैध डंपिंग और गैर-अनुमोदित ईंधन के इस्तेमाल पर नजर रखेंगी। ग्रीन दिल्ली और 311 एप पर मिलने वाली शिकायतों का भी समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
48 हॉटस्पॉट पर चलेगा विशेष अभियान
दिल्ली के 48 प्रदूषण हॉटस्पॉट में विशेष प्रवर्तन अभियान चलेगा। जिलाधिकारियों की सीधी निगरानी में टीमें इन इलाकों में प्रदूषणकारी गतिविधियों पर कार्रवाई करेंगी। खास तौर पर अनधिकृत औद्योगिक इकाइयां अभियान के निशाने पर रहेंगी। मेटल कास्टिंग, पाउडर कोटिंग, बफिंग-पॉलिशिंग, प्लास्टिक कचरे का पुनर्प्रसंस्करण, स्प्रे पेंटिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसी गतिविधियों की जांच होगी। जल प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इनमें जींस रंगाई-धुलाई, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, एनोडाइजिंग और पिकलिंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
एनसीआर के साथ मिलकर होगी कार्रवाई
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से बृहस्पतिवार को दिल्ली-एनसीआर की प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना की समीक्षा के बाद दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने अपनी तैयारियों को बताया। बैठक में दिल्ली के साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मंत्री और अधिकारी शामिल हुए।