एनटीपीसी दादरी में कई वर्षों से लगे राख के ढेर को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के भराव में मिट्टी के साथ इस्तेमाल करके ठिकाने लगा दिया है। एक्सप्रेसवे के लिए एनएचएआई ने 30 लाख टन राख की मांग की थी। राख के ढेर को उठा लिया गया है।
दादरी के एनटीपीसी प्लांट में कोयला पर आधारित चार इकाईयों का संचालन होता है। उनके लिए हर रोज कोयले की तीन ट्रेनें आती हैं। कोयले की खपत अधिक होने और उससे निकलने वाली राख को एनटीपीसी प्लांट के चार दीवारी के नजदीक 350 एकड़ जमीन पर स्टॉक किया जाता रहा है।
यहां पर राख का ढेर लग गया था। एक बडे़ हिस्से पर राख का पहाड़ बनाकर उस पर पेड़-पौधे लगाए हुए हैं। राख को ठिकाने लगाने के लिए ईंट बनाने, सीमेंट बनाने समेत दूसरे कार्य में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसके साथ ही दूर दराज से राख लेने के लिए ट्रकों की लंबी लाइन लगी रहती हैं।
इसके बाद भी राख कम नहीं हो पा रही थी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू होने के बाद ही एनएचएआई ने एनटीपीसी से 30 लाख टन राख देने की डिमांड की थी। डिमांड के मुताबिक राख दी गई। मात्र एक साल के अंदर ही राख के एक बडे़ पहाड़ नुमा ढेर को वहां से उठा दिया है।
राख को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे में भराव के रूप में इस्तेमाल किया गया है। यहीं नहीं रेलवे के द्वारा बनाए जा रहे दादरी आरओबी के दोनों ओर मिट्टी के बजाए राख को डाला गया है। राख को डालकर पानी से बैठा दिया गया है। एनटीपीसी के अधिकारी पहले भी राख का इस्तेमाल सड़कों को समतल करने के लिए भराव करने की सलाह देते रहे हैं।
राख उड़ने से आसपास के गांवों के लोग थे परेशान
एनटीपीसी की चारदीवारी के नजदीक बने राख का ढेर काफी ऊंचा हो गया था। राख उड़ने के कारण नजदीक के गांव ऊंचा अमीरपुर, खंगौडा, जारचा, मुठियानी, उपरालसी, सिलारपुर, गुलावठी, धनौवास समेत कई गांवों के लोग परेशान थे। जिसको लेकर कई बार ग्रामीण विरोध भी करते रहे हैं।
एक्सप्रेसवे में सबसे अधिक इस्तेमाल हुई राख
एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी पंकज सक्सेना ने बताया कि एनएचएआई ने एनटीपीसी से 30 लाख टन राख की मांग की थी। राख को एक्सप्रेसवे के लिए दे दिया गया है।