दिल्ली में सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने को लेकर गठित स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब तक करीब 28 लाख वर्गमीटर सरकारी जमीन से कब्जा हटाया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इससे समझा जा सकता है कि दिल्ली कितनी गंभीर समस्या से जूझ रही है। कोर्ट दिल्ली में सीलिंग मामले की सुनवाई कर रही है।
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एसटीएफ ने बताया उन्हें अतिक्रमण की करीब 7000 शिकायतें मिली हैं और करीब 3400 पर कार्रवाई की जा चुकी है। करीब 3200 किलोमीटर की सड़क से अतिक्रमण को हटाया गया है। एसटीएफ ने कहा कि 10,71,838 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बनाए गए स्थायी ढांचों को ढहाया गया है, जबकि 16,99,858 वर्ग मीटर जमीन खाली कराई गई है।
इसके बाद पीठ ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माणों की समस्या किस कदर है। पीठ ने कहा कि जिन जगहों से अतिक्रमण हटाए गए हैं सरकारी निकायों को उन जगहों का संरक्षण करना चाहिए जिससे कि वहां फिर से अतिक्रमण न हो।
डीडीए उपाध्यक्ष को लगाई फटकार
पीठ ने एसटीएफ के एक अन्य सदस्य दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइस चेयरमैन तरुण कपूर द्वारा रिपोर्ट न दाखिल करने पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने उनसे पूछा कि आखिर हो क्या रहा है? हर 15 दिनों में आपको रिपोर्ट दाखिल करनी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पीठ ने कहा कि अगर आप काम नहीं करना चाहते हैं तो हमें बताइए हम किसी और को यह काम सौंप देंगे।