विश्वभर में सबसे बड़े सिर वाले बच्चों में शुमार रह चुकी 25 महीने की बेबी रूना अब आराम से सो सकेगी। इलाज की दूसरी प्रक्रिया सफल रहने से बेबी रूना को सोते समय आने वाली परेशानियों से निजात मिल गई है।
फोर्टिस में भर्ती रूना को शुक्रवार सुबह अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। त्रिपुरा निवासी रूना जन्म से ही हाईड्रोसिफेलसर बीमारी से पीड़ित थी।
इस बीमारी में सिर के भीतर बनने वाला तरल अवशोषित नहीं हो पाता, जिससे सिर का आकार बढ़ता जाता है। न्यूरो सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. संदीप वैश्य ने बताया कि रूना को 16 अप्रैल, 2013 को फोर्टिस में भर्ती कराया गया था।
इलाज की पहली प्रक्रिया में रूना के सिर की कई बार सर्जरी की गई। तीन सप्ताह में एक बार एक्सट्रा वेंटिकूलर ड्रेन से उसके मस्तिष्क का तरल पदार्थ निकाला गया।
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इसके सफल रहने पर 11 जुलाई तक खोपड़ी की हड्डियों की दोबारा से संरचना भी की गई। इलाज की पहली प्रक्रिया में रूना के सिर का आकार तो कम हो गया था, लेकिन वह अपना सिर केवल एक तरफ हिलाने के योग्य हो पाई थी।
इलाज की दूसरी प्रक्रिया के बाद रूना के सिर का आकार पहले से अधिक अनुपातिक और संतुलित बन गया है। अब वह अपने पेट के बल भी सोने के लिए सक्षम बन गई है।
याद रहेगा जज्बा
प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी डिपार्टमेंट में सीनियर कंसलटेंट डॉ. रश्मि तनेजा ने कहा कि इस बच्ची ने इलाज के लिए जो जज्बा दिखाया है, वह हमेशा याद रहेगा।
रूना ने उम्मीद से ज्यादा और वक्त से पहले रिकवर किया है। उन्होंने कहा कि रूना को कुछ समय बाद दोबारा सर्जरी के दौर से गुजरना होगा, लेकिन उसका लगातार बेहतर होता स्वास्थ्य दिल को खुशी देने वाला है।
फोर्टिस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दलप्रीत बराड़ ने रूना के इलाज में जुटी टीम को बधाई दी।