एम्स में शुरू हुए त्वचा बैंक के बाद से अभी तक 22 त्वचा प्रत्यारोपण हुए। इससे छह लोगों को लाभ हुआ। त्वचा दान को बढ़ावा देने के लिए एम्स में प्लास्टिक सर्जरी विभाग और ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग संगठन ने रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट के सहयोग से त्वचा दान पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसकी मदद से त्वचा दान के लिए जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में एम्स के निदेशक प्रो. एम. श्रीनिवास ने त्वचा दान को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही त्वचा दान पर एक सूचनात्मक पुस्तिका भी जारी की। सत्र का उद्घाटन ओआरबीओ की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. आरती विज ने किया। एम्स के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. मनीष सिंघल ने बताया कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर शव से त्वचा निकाली जा सकती है। फिर त्वचा को लगभग तीन महीने तक संसाधित किया जाता है। जिसके बाद इसे पांच साल तक संग्रहीत किया जा सकता है। इसकी मदद से गंभीर रूप से जलने या दर्दनाक चोटों वाले रोगियों में जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब तक एक वर्ष के दौरान 22 त्वचा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं, जिससे छह रोगियों को लाभ मिला है। कार्यक्रम में डॉ. शशांक चौहान, डॉ. शिवांगी साहा, डॉ. नंदिनी सिंह तंवर, डॉ. मंजू आर, डॉ. तनु सागर, डॉ. अभिलाष एस ने त्वचा दान से संबंधित विभिन्न चरणों के बारे विस्तार से बताया। इस प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम में त्वचा दान से संबंधित कई जानकारी दी गई।