राजधानी के दो अलग-अलग इलाकों से दिल्ली पुलिस और लेबर विभाग ने 22 बच्चों को मुक्त कराया है। ये बच्चे छोटी-छोटी दुकानों पर काम कर रहे थे। खास बात है कि इन बच्चों को काम के बदले दो महीने में दस रुपये भी नहीं मिले, जबकि उन्हें उत्तर प्रदेश से दिल्ली में पढ़ाई और काम के बदले वेतन पर लाया गया था।
बचपन बचाओ आंदोलन के प्रमुख राकेश सेंगर के ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि पूर्वी दिल्ली इलाके में बच्चों से जबरदस्ती काम कराया जा रहा है। यह सूचना उन्होंने एसडीएम मयूर विहार समेत लेबर डिपार्टमेंट और दिल्ली पुलिस को दी।
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तीनों ने मिलकर मयूर विहार से लगे कोटला इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दस से 14 साल के नौ बच्चों को बड़ी दयनीय हालत में काम करते पाया गया। बच्चों से बाइक, ऑटो आदि की रिपेयरिंग और डेटिंग-पेटिंग का काम कराया जाता था।
मुक्त कराए गए बच्चे मीडापुर और बुलंदशहर के रहने वाले हैं। वहीं, बुराड़ी इलाके से 11 बच्चों को मुक्त कराया गया है। यहां कई बच्चे के हाथ जले हुए मिले। बच्चों को सरकार के शेल्टर होम में भेज दिया गया है। पुलिस परिजनों की तलाश कर रही है, ताकि उन्हें सुरक्षित घर भेजा जा सके। कार्रवाई के दौरान बच्चों से मजदूरी करवाने के आरोप में दस लोगों को गिरफ्तार किया गया और छह यूनिटें (दुकानें) सील की गई हैं।