बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से रविवार से शहर में कोयला और बायोमास का इस्तेमाल करने वाली 210 फैक्ट्रियां बंद रहेंगी। ईपीसीए के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चार नवंबर से 10 नवंबर तक इन फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश दिया है। इसका असर फैक्ट्रियों में काम करने वाले करीब दो लाख मजदूरों पर पड़ेगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अशोक तिवारी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण स्तर बढ़ने के कारण ईपीसीए का निर्देश है कि कोयला और बायोमास से चलने वाली फैक्ट्रियों को चार से दस नवंबर तक बंद किया जाए। इस बीच नेचुरल गैस का इस्तेमाल कर रहीं फैक्ट्रियां संचालित रहेंगी। उन्होंने बताया कि लोनी, राजेंद्र नगर, कविनगर आदि औद्योगिक क्षेत्र में सर्वे कर ऐसे 210 फैक्ट्रियों को चिन्हित किया गया, जो कोल और बायोमास का इस्तेमाल कर रही हैं। इन सभी को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया है।
इन फैक्ट्रियों में ज्यादातर लोहे के उत्पाद, फूड, केमिकल, टेक्सटाइल, पेंट की हैं। नोटिस जारी करने के अलावा विभाग बीच-बीच में फैक्ट्रियों की चेकिंग भी करेगा। सूत्रों के मुताबिक प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित गिरावट नहीं आई तो फैक्ट्री बंद करने की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।