अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अधिकारी समीर वानखेड़े के प्रमोशन से संबंधित एक मामले में तथ्यों को छिपाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के वानखेड़े को संयुक्त आयुक्त के पद पर प्रमोशन देने के आदेश को बरकरार रखने वाले हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा मांगी गई थी।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति मधु जैन की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी निंदा की। समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि याचिकाकर्ता (केंद्र सरकार) एक राज्य के रूप में याचिका दायर करने से पहले सभी तथ्यों को सच्चाई के साथ उजागर करेगा। हम इस समीक्षा याचिका को 20 हजार रुपये के जुर्माने के साथ खारिज करते हैं। पिछले साल, संयुक्त आयुक्त के पद पर नियमित प्रमोशन के लिए पात्र अस्थायी अधिकारियों के मामले पर विचार करने के लिए गठित विभागीय प्रमोशन समिति (डीपीसी) ने वानखेड़े के मामले को सीलबंद लिफाफे में रखा था। यह बताया गया था कि उनके खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले लंबित हैं, साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी चल रही है।