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Delhi Malviya Nagar Fire: विवेक विहार से पालम और मालवीय नगर तक, कहीं 9 तो कहीं 21 मौतें; जानें कब-कब हुए हादसे

Wed, 03 Jun 2026 12:33 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

Malviya Nagar Delhi Fire Tragedy: दिल्ली में मालवीय नगर के रेस्टोरेंट में आज सुबह हादसा हो गया। आग की चपेट में आने से 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
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दिल्ली मालवीय नगर अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बुधवार सुबह मालवीय नगर के हौजरानी स्थित लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में भीषण आग लग गई। इस हादसे में अब तक 21 लोगों की जान चली गई है और 37 लोग घायल हुए हैं। हाल ही के दिनों में दिल्ली के पालम, साकेत और विवेक विहार अग्निकांड में भी दर्दनाक हादसे हुए। जिसमें कई लोगों की मौत हो चुकी है।

आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 10 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। दमकल कर्मियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया।

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हादसे के बाद भी दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है। उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

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दिल्ली के होटल में लगी आग - फोटो : वीडियो ग्रैब
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली फायर सर्विस टीम को मालवीय नगर में लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। जिसके तुरंत बाद दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट के बेसमेंट से ये आग लगनी शुरू हुई। रेस्टोरेंट के बेसमेंट से गंभीर हालत में लोगों को रेस्क्यू किया गया। इस आग की वजह से अब तक 20 लोगों की मौत हो गई है और 37 लोग घायल हैं। घायलों को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

विवेक विहार में चार मंजिला इमारत में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में कब-कब हुए अग्निकांड के भयंकर हादसे
राजधानी दिल्ली में बीते कुछ महीनों में आग के कई मामले सामने आई है। ताजा मामला विवेक विहार इलाके में सामने आया था।पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई थी। दरअसल, विवेक विहार में घटना की शुरुआती जांच में सामने आया कि भवन में नियमों की अनदेखी और अवैध निर्माण के चलते ही आग तेजी से फैली, जिससे बड़ा हादसा हुआ।

विवेक विहार अग्निकांड में नौ लोगों की मौत
अधिकारियों के अनुसार, कई इमारतों में बिना स्वीकृति अतिरिक्त निर्माण किया जाता है। ऐसे निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बनते हैं। इसी को देखते हुए अब विशेष अभियान चलाकर ऐसे निर्माणों की पहचान और कार्रवाई होगी। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि विवेक विहार की घटना ने सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट संकेत मिले कि बिल्डिंग में निर्माण तय मानकों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने बताया कि अब सभी जोनों में सर्वे कराया जाएगा, जिसमें खासतौर पर घनी आबादी वाले इलाकों और संकरी गलियों में बने भवनों की जांच होगी। जहां भी अवैध निर्माण या सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाएगी, वहां तुरंत सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

पालम अग्निकांड - फोटो : भूपिंदर सिंह
पालम अग्निकांड हादसा
पालम अग्निकांड में 9 लोगों की अकाल मौत हो गई। पालम अग्निकांड की जांच रिपोर्ट अब तक समाने नहीं आ सकी है।  हादसे के तीन महीने बाद भी डीएम की रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। दिल्ली फायर विभाग और बिजली कंपनी बीएसईएस ने बताया था कि आग के कारणों का पता नहीं लगा है। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि फायर विभाग, बिजली कंपनी बीएसईएस समेत सभी विभागों ने अपनी रिपोर्ट दे दी है, मगर किसी ने कुछ नहीं बताया है।

साकेत में आग - फोटो : अमर उजाला
साकेत इमारत ढहने की घटना में 6 की मौत
चार दिन पहले दिल्ली के साकेत में सैदुल्लाजाब में बहुमंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी। आखिरकार एमसीडी की अवैध निर्माण के मामले में नींद टूट गई है। अब उसने जहां अवैैध निर्माण को चिह्नित करना शुरू कर दिया है, वहीं मंगलवार को विस्तृत रिपोर्ट जारी कर अपनी कार्रवाई और बचाव अभियान की जानकारी भी दी है। 

बीते मंगलवार को घटनास्थल के आसपास कई अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के मालिकों केे नोटिस जारी किए गए हैं और नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है। एमसीडी ने कहा कि हादसे की सूचना मिलते ही अधिकारियों और मशीनरी को घटनास्थल पर भेज दिया गया था। 

Delhi Restaurant Fire - फोटो : @attorneybharti
दिल्ली में इस साल अब तक 45 लोगों की जान, 200 से अधिक झुलसे
दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2024 में आग से 113 मौतें हुईं, जो 2025 में घटकर 76 रह गईं। वर्ष 2026 में 3 मई तक 45 लोगों की जान जा चुकी है और 200 से अधिक लोग झुलस चुके हैं। रोहिणी और पालम जैसे हादसे इस खतरे की जमीनी हकीकत दिखाते हैं। 

15 अप्रैल का वो खौफनाक दिन जब रोहिणी के बुध विहार इलाके में आग की घटना ने लोगों का दिल झकझोर कर रखा दिया था। यहां झुग्गियों में आग लगी थी और पति-पत्नी के साथ उनकी तीन साल की बच्ची की जिंदा जलकर मौत हो गई। आग इतनी भयावह थी कि परिवार को निकलने का रास्ता तक नहीं मिला और वो जिंदा जल गए।
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लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में लगी आग - फोटो : @attorneybharti
18 मार्च की सुबह जब दिल्ली के पालम इलाके में लोग नींद से जाग ही रहे थे, तभी चार मंजिला इमारत आग रूपी काल के मुंह में समा रही थी। इस भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि परिवार के 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दर्दनाक घटना में मृतकों की संख्या महज एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि दिल्ली के प्रशासनिक खोखलेपन व सुरक्षा मानकों की अनदेखी की एक डरावनी तस्वीर है। 

सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 80-90 फायर कॉल मिलती हैं, लेकिन अप्रैल में 140 पहुंच गई थी। आग की घटनाएं एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि झुग्गी क्लस्टर, कूड़े के ढेर, गोदाम व रिहायशी मकानों सभी जगहों से कॉल आ रही हैं।
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