फर्जी पतों पर बैंक खाते खोलकर देशभर के सैकड़ों लोगों से दो करोड़ रुपये से ज्यादा ठगने वाले गिरोह का मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को भी पकड़ा है। ठगी करने वाले मास्टर माइंड इन खातों का इस्तेमाल कर रकम भेज देते थे। बाद में आरोपी अपना हिस्सा काटकर बाकी की रकम दूसरे खातों में भेज देते थे।
पुलिस ने गिरोह के 100 से अधिक खातों का पता लगाया है। साथ ही, 27 मोबाइल, 31 सिमकार्ड, 14 पासबुक, तीन चेकबुक, 13 पैनकार्ड, 12 आधार, 20 एटीएम, एक लैपटॉप, प्रिंटर बरामद करने के अलावा चार लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में फ्रीज किए हैं। आरोपियों की पहचान मास्टरमाइंड दिल्ली निवासी दर्वेश कुमार (41), प्रियंका सरकार (24), दीपक (29) व गांव गटखेड़ा, फरीदाबाद निवासी अजीत सिंह (35) और 17 साल के किशोर के रूप में हुई है।
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त संजय कुमार सेन ने बताया कि जनवरी में एक महिला गूगल पर डॉक्टर का पता ढूंढते हुए ठगी का शिकार हुई थी। पीड़िता को रिश्तेदार को डॉक्टर को दिखाना था। उसने डॉक्टर से समय लेने के लिए गूगल की मदद ली, लेकिन वह ठगों के जाल में फंस गई और उसके खाते से 61800 रुपये निकाल लिए गए। पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर खेमेंद्र पाल सिंह ने टीम का गठन किया। जांच में पता चला कि ठगी की रकम को फरीदाबाद के एक एटीएम बूथ से निकाला गया है। पुलिस ने एटीएम की सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की। इसके अलावा खाते की जांच में पता चला कि ये बुध विहार दिल्ली में किसी सुंदर कुमार के नाम पर है। पुलिस वहां पहुंची तो पता फर्जी निकला। यहां पुलिस को पता चला कि किसी ने उसी एरिया से खाते का पता एक साइबर कैफे से बदला था। साइबर कैफे मालिक की मदद से पुलिस ने 28 जून को 17 साल के नाबालिग को दबोच लिया।
ऐसे पकड़े गए बाकी सभी आरोपी
पुलिस ने नाबालिग से पूछताछ की तो उसने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड कराला निवासी दर्वेश कुमार है। पुलिस ने नाबालिग से पूछताछ के बाद दर्वेश और प्रियंका को कराला से दबोच लिया। आरोपियों ने बताया कि यह विभिन्न बैंकों में फर्जी दस्तावेज के आधार पर दर्जनों बैंक अकाउंट खोलते हैं। बाद में 18 से 20 हजार में दीपक को बेच देते हैं। छानबीन के बाद दीपक को गिरफ्तार किया गया तो उसने बताया कि वह आगे अजीत को 25 हजार में खाते बेचता था। अजीत के कई जालसाजों से संपर्क हैं। वह खाते 30 से 35 हजार में बेच देता था। इसके अलावा वह कई बार खातों से रकम निकलवाकर 10 फीसदी ठगी का अपना हिस्सा रखकर बाकी रकम दूसरे खातों में भेज देता था।
ऐसे खोले जाते थे फर्जी खाते
आरोपी गरीब लोगों को बहलाकर उनसे दस्तावेज लेकर खाते खोल लेते थे। इसके बदले में कुछ रुपये भी देते थे। बाद में उनके आधार कार्ड पर पता बदलवाकर फर्जी पैन कार्ड बनवा लेते थे। इसके बाद खाता खुलवाकर उसे इस्तेमाल कर लिया जाता था। फर्जी दस्तावेज के आधार पर सिमकार्ड भी प्राप्त कर लिया जाता था। इन सब की मदद से आसानी से खाता खुल जाता था। इसमें ठगी की रकम भेजकर बाद में उसे निकाल लिया जाता था।