कूड़े के पहाड़ों के कारण आसपास के इलाकों में दुर्गंध, गंदगी और प्रदूषण लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। लैंडफिल का आकार घटने से स्थानीय लोगों को पर्यावरण और जीवन गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। वहीं, घनी आबादी वाले शहर में 100 एकड़ जमीन का दोबारा उपयोग संभव होना भी महत्वपूर्ण है।
दिल्ली के तीनों प्रमुख लैंडफिल-ओखला, भलस्वा और गाजीपुरसे कचरे का बोझ लगातार घट रहा है। इन साइटों पर अब तक करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण कर लगभग 100 एकड़ जमीन रिक्लेम की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे कूड़े के पहाड़ों से दिल्ली को मुक्त कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
विज्ञापन
ओखला में करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरे के प्रसंस्करण से 35 एकड़, भलस्वा में 102 लाख मीट्रिक टन से 45 एकड़ और गाजीपुर में 44 लाख मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण से 20 एकड़ जमीन उपयोग योग्य बनाई गई है।
सरकार का अगला लक्ष्य पुराने लैंडफिल खत्म करने के साथ नए कूड़े के पहाड़ बनने से रोकना है। इसके लिए चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि रोजाना निकलने वाले कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाई जा सके। सरकार ने वैज्ञानिक और समयबद्ध रोडमैप के जरिये 2047 तक स्वच्छ दिल्ली का लक्ष्य रखा है।
विज्ञापन
कूड़े के पहाड़ों के कारण आसपास के इलाकों में दुर्गंध, गंदगी और प्रदूषण लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। लैंडफिल का आकार घटने से स्थानीय लोगों को पर्यावरण और जीवन गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। वहीं, घनी आबादी वाले शहर में 100 एकड़ जमीन का दोबारा उपयोग संभव होना भी महत्वपूर्ण है।
गाजीपुर में प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले इनर्ट मटेरियल का इस्तेमाल निचले इलाकों के भराव और सड़क निर्माण में बेस तैयार करने के लिए किया जा रहा है। इससे कचरा कम करने के साथ उपयोगी सामग्री के पुन: इस्तेमाल की कोशिश की जा रही है।
कूड़ा उठाने वाली एक हजार इलेक्ट्रिक मशीनें होंगी तैनात
नई दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर सफाई व्यवस्था जल्द ही पारंपरिक झाड़ू-कटाई से आगे बढ़कर आधुनिक मशीनों और इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित होने जा रही है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों से कूड़ा उठाने के लिए एक हजार इलेक्ट्रिक मशीनें तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही सड़कों से धूल हटाने और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग व्यवस्था का भी विस्तार किया जाएगा। फिलहाल निगम के पास 66 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं, जिनसे रोजाना करीब 190 मीट्रिक टन धूल हटाई जा रही है।