अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दो लोगों की मौत का कारण पता लगाने के लिए एफआईआर दर्ज करने संबंधी मजिस्ट्रेट के 2017 के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि नुकसान के प्रति सहानुभूति, चाहे वह कितनी भी सच्ची और समझने योग्य क्यों न हो, कानूनी आधार का विकल्प नहीं बन सकती। विशेष न्यायाधीश भूपिंदर सिंह दिल्ली पुलिस की उस पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पहाड़गंज थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को 1984 के दंगों में अमीर सिंह और नरेंद्र सिंह नामक व्यक्ति की मौत को लेकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाले जनवरी 2017 के आदेश को चुनौती दी गई थी। 31 अगस्त के आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि शिकायतकर्ता की पीड़ा और मामले की त्रासदी के प्रति सचेत रहते हुए भी अदालत को उपलब्ध सामग्री और कानून के आधार पर ही फैसला करना होगा।