फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

1984 Sikh Riots Case: दोषी सज्जन कुमार को मिले फांसी की सजा, आज आ सकता है फैसला

Tue, 18 Feb 2025 12:34 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में 1984 के सिख दंगों के एक मामले में दोषी सज्जन कुमार को फांसी की मांग की गई है। अभियोजन पक्ष की ओर से ये मांग की गई है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिता-पुत्र की हत्या मामले में सज्जन कुमार को दोषी माना है।
विज्ञापन
सज्जन कुमार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

1984 के सिख दंगों के एक मामले में पूर्व कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया गया है। आज कोर्ट में सज्जन कुमार को सजा हो सकती है। दिल्ली में साल 84 में हुए सिख दंगा के दौरान सरस्वती विहार में पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई थी। जिसमें सज्जन कुमार को दोषी माना है।   

विज्ञापन


वहीं अभियोजन पक्ष ने कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के लिए मौत की सजा की मांग की है। उन्हें नवंबर 1984 में सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। सरकारी वकील को अपनी लिखित दलीलें दाखिल करनी हैं। वह निर्भया और अन्य मामलों में दिशा-निर्देशों में मौत की सजा के लिए दबाव डाल रहे हैं। वरिष्ठ वकील ने भी अपनी लिखित दलीलें दाखिल की हैं।

1984 के सिख विरोधी दंगों की पीड़िता लक्ष्मी कौर ने सज्जन कुमार को हत्या का दोषी ठहराए जाने पर अपने विचार व्यक्त किए। कोर्ट आज सजा सुना सकती है। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। इस दौरान सिख समुदाय के लोगों की हत्याएं हुईं और इस घटना से जुड़े मामलों में 40 साल बाद भी कई बड़े मोड़ देखने को मिले हैं।
विज्ञापन

 

84 सिख दंगा के दौरान सरस्वती विहार में हुए पिता-पुत्र की हत्या मामले में पूर्व कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया गया था। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने सज्जन कुमार की मौजूदगी में फैसला सुनाया था। सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल से अदालत में लाया गया था। कुमार साल 2018 से जेल में बंद है। वर्ष 2021 में सज्जन कुमार के खिलाफ धारा 302, 147, 148, 149, 308, 323, 395 के अलावा अन्य आरोप तय किए गए थे।

विज्ञापन

सज्जन कुमार की सिख दंगों में भूमिका?
सज्जन कुमार का नाम दिल्ली में सिखों के खिलाफ दंगों को भड़काने में आता है। खासकर दिल्ली के सुल्तानपुरी, कैंट और पालम कॉलोनी जैसे इलाकों में। दंगों के पीड़ितों के मुताबिक, 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में भीड़ को संबोधित करते हुए सज्जन कुमार को कहते सुना गया था- 'हमारी मां मार दी, सरदारों को मार दो।'

सज्जन सिंह के खिलाफ दायर मामलों में कई गवाहों ने अपने बयान में कहा कि सज्जन सिंह ने निजी तौर पर सिखों के घरों की पहचान करवाकर भीड़ को हमले के लिए उकसाया था। आरोप ये भी थे कि सज्जन सिंह के समर्थकों ने दिल्ली में वोटर लिस्ट के जरिए सिखों के घर और बिजनेस की पहचान की और उनमें तोड़फोड़ की या आग लगा दी। कई सिखों को उनके घरों से निकालकर मारा गया। 

इन घटनाओं से जुड़ा सज्जन कुमार का नाम
सज्जन कुमार का नाम 31 अक्तूबर 1984 को हुए दंगे में आता है। इस दौरान उन्होंने दिल्ली कैंट क्षेत्र में भीड़ को उकसाया था। इस भीड़ ने कई घरों में आगजनी की घटना को अंजाम दिया। सज्जन कुमार के उकसावे के बाद दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में भीड़ ने पांच सिखों- केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी थी। 

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) और पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की तथ्य खोजने वाली टीमों ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में जो दंगे हुए थे, उनमें अधिकतर सिख पीड़ितों ने कांग्रेस सांसद पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया था। कई लोगों ने बाद में इस सांसद की पहचान सज्जन कुमार के तौर पर की। 

किन-किन मामलों में दोषी पाए गए सज्जन कुमार
सज्जन कुमार के खिलाफ कई अहम तथ्य और सबूत मौजूद होने के बावजूद उनके खिलाफ किसी भी मामले में आरोप तय नहीं किए जा सके। 2002 में सिख दंगे से जुड़े एक मामले में दिल्ली की एक निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। 

2005 में सीबीआई ने जीटी नानावटी कमिशन की रिपोर्ट के आधार पर सज्जन कुमार के खिलाफ नया केस दर्ज किया। 

2010 में इस मामले पर दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में सुनवाई हुई। इस मामले में बलवान खोखर, महेंद्र यादव, महा सिंह समेत कई और को आरोपी बनाया गया।

2013 में कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया। हालांकि, मामले में पांच लोगों को दोषी करार दिया गया और सजा सुनाई गईं। इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष में जबरदस्त गुस्सा था। एक प्रदर्शनकारी ने मामले की सुनवाई कर रहे जज की तरफ जूता तक उछाल दिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को तब उठाया, जब जगदीश कौर नाम की एक पीड़ित और गवाह ने सीबीआई के साथ सज्जन कुमार के खिलाफ केस दायर किया। उन पर पांच सिखों की हत्या करने वाली भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया। जिन सिखों की हत्या हुई थी, उनमें जगदीश कौर के पति और बेटे शामिल थे। साथ ही जगशेर सिंह के तीन भाई शामिल थे। इस मामले में एक और मुख्य गवाह निरप्रीत कौर थीं। 
सीबीआई ने हाईकोर्ट के सामने कहा था कि इन घटनाओं के चश्मदीद गवाहों ने सज्जन कुमार का नाम इंक्वायरी के लिए गठित आयोग को दिया था। इसमें नरसंहार में सज्जन कुमार पर लगे आरोपों की जांच की मांग की गई थी। हालांकि, निचली अदालत ने चश्मदीदों की गवाही देने से रोक दिया था। इस मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान एक और चश्मदीद गवाह चम कौर ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने सज्जन कुमार को सुल्तानपुरी इलाके में भीड़ को संबोधित करते देखा था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें