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84 दंगें का दर्दनाक सच: अभी तक पूरी नहीं हुई ये जांच

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सिख विरोधी दंगों के तीस साल बाद भी एक मामले में जांच पूरी नहीं हुई है। मामला शुरुआत में नांगलोई थाने में दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। यह खुलासा आरटीआई में प्राप्त सूचना में हुआ है।
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दिल्ली पुलिस के एंटी रॉयट सेल से आरटीआई में प्राप्त जानकारी के मुताबिक दंगों से संबंधित सात मामलों में एक अदालत में विचाराधीन है तो एक अन्य मामले में जांच लंबित है। जिस मामले की जांच लंबित वह नांगलोई थाने में दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय के आदेश पर इस मुकदमे की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

दंगों के बाद दर्ज 255 मुकदमों में से 7 मुकदमें के आरोपियों को इस साल सितंबर तक दोषी ठहराए जाने के बाद सजा दी गई। सात मुकदमों में 27 आरोपियों को सजा मिली जबकि 121 मुकदमों में 591 आरोपियों को अदालतों ने बरी कर दिया। यह जवाब दिल्ली पुलिस ने गोपाल प्रसाद को आरटीआई के जवाब में दिया है।
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दंगों की जांच के लिए 1990 में दिल्ली पुलिस के एंटी रॉयट सेल का गठन किया गया था। दंगों के दौरान मारे गए 326 लोगों की हत्या के सिलसिले में 255 मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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717 करोड़ में से सिर्फ 517 करोड़ ही बंटे

इन मुकदमों में 622 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें चार आरोपियों पर फिलहाल मुकदमा चल रहा है। सरकार ने 30 अक्तूबर को 1984 सिख विरोधी दंगों के 3325 पीड़ितों व उनके रिश्तेदारों को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।
 
यूपीए सरकार ने वर्ष 2006 में दंगा पीड़ितों की मदद के लिये 717 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था। इसमें सिख विरोधी दंगों के दौरान मरने वालों के परिवार को साढ़े तीन लाख रुपये का मुआवजा बात कही गई थी।

दंगों में घायल हुए व संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान था। सरकार की ओर से दी गई 717 करोड़ की सहायता राशि में से केवल 517 करोड़ रुपये ही बांटे जा सके। दावदारों से संबंधित विवाद के चलते 200 करोड़ रुपये दंगा पीड़ितों को नहीं बांटे जा सके।
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