सिख विरोधी दंगों के तीस साल बाद भी एक मामले में जांच पूरी नहीं हुई है। मामला शुरुआत में नांगलोई थाने में दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। यह खुलासा आरटीआई में प्राप्त सूचना में हुआ है।
दिल्ली पुलिस के एंटी रॉयट सेल से आरटीआई में प्राप्त जानकारी के मुताबिक दंगों से संबंधित सात मामलों में एक अदालत में विचाराधीन है तो एक अन्य मामले में जांच लंबित है। जिस मामले की जांच लंबित वह नांगलोई थाने में दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय के आदेश पर इस मुकदमे की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
दंगों के बाद दर्ज 255 मुकदमों में से 7 मुकदमें के आरोपियों को इस साल सितंबर तक दोषी ठहराए जाने के बाद सजा दी गई। सात मुकदमों में 27 आरोपियों को सजा मिली जबकि 121 मुकदमों में 591 आरोपियों को अदालतों ने बरी कर दिया। यह जवाब दिल्ली पुलिस ने गोपाल प्रसाद को आरटीआई के जवाब में दिया है।
दंगों की जांच के लिए 1990 में दिल्ली पुलिस के एंटी रॉयट सेल का गठन किया गया था। दंगों के दौरान मारे गए 326 लोगों की हत्या के सिलसिले में 255 मुकदमे दर्ज किए गए थे।